समीक्षा

एक ख़ुशबू वहाँ फैली थी : निशांत उपाध्याय

एक ख़ुशबू वहाँ फैली थी : निशांत उपाध्याय

‘एक ख़ुशबू वहाँ फैली थी’ 71 वर्षीय रुस्तम का नवीनतम कविता-संग्रह है, जो प्रेम पर केन्द्रित है. मिनिमलिस्ट शैली के वे अपनी तरह के अप्रतिम कवि हैं, और यह प्रेम-पथ...

घेराबंदी और अन्य कविताएँ: फ़रीद ख़ाँ

घेराबंदी और अन्य कविताएँ: फ़रीद ख़ाँ

‘काग़ज़ के प्रदेश में’, ‘चुप्पी का शोर’, ‘योजनाओं का शहर’ और ‘तनी हुई रस्सी पर’ के बाद ‘घेराबंदी और अन्य कविताएँ’ कवि-संपादक संजय कुंदन का नया कविता-संग्रह है, जिसे सेतु...

एक चरवाहे का गीत : महेश कुमार

एक चरवाहे का गीत : महेश कुमार

केतन यादव के पहले कविता-संग्रह, ‘एक चरवाहे का गीत’ की चर्चा कर रहे हैं महेश कुमार. इसे राधाकृष्ण प्रकाशन ने सुरुचिपूर्ण ढंग से प्रकाशित किया है. केतन यादव की कविताएँ...

टिकट टू केरला : अरविंद दास

टिकट टू केरला : अरविंद दास

पिछले दिनों ‘द हिंदू’ से जुड़े पत्रकार एस आर प्रवीण की पुस्तक ‘Ticket to Kerala: The Story of Malayalam Cinema प्रकाशित हुई है. लोकप्रियता और कलात्मकता के बीच लगातार संतुलन...

भारत के प्रगतिशील पुरुषों के पतिपन की पड़ताल : अमिता शीरीं

भारत के प्रगतिशील पुरुषों के पतिपन की पड़ताल : अमिता शीरीं

इतिहासकार और सबाल्टर्न-अध्ययन परियोजना के संस्थापक सदस्यों में शामिल ज्ञानेंद्र पांडेय की पुस्तक ‘Men at Home’ में कुछ प्रसिद्ध भारतीय पुरुषों के पतिपन का विश्लेषण किया गया है. यह पुस्तक...

अरसलान और बहज़ाद :  पवन करण

अरसलान और बहज़ाद : पवन करण

‘मौत की किताब’ और ‘नेमतख़ाना’ के बाद ‘अरसलान और बहज़ाद’ ख़ालिद जावेद का तीसरा उपन्यास है, जो उर्दू से हिंदी में अनूदित होकर राजकमल से प्रकाशित हुआ है. उल्लेखनीय है...

‘देखने के तरीक़े’ यानी तरीक़े से देखना : दीपक त्रिपाठी

‘देखने के तरीक़े’ यानी तरीक़े से देखना : दीपक त्रिपाठी

जॉन बर्जर की 1972 में प्रकाशित पुस्तक ‘देखने के तरीक़े’ (Ways of Seeing) यह रेखांकित करती है कि छवियों को समझने में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका...

जब से आँख खुली है : अनूप सेठी

जब से आँख खुली है : अनूप सेठी

हिन्दी के वरिष्ठ कवि-लेखक लीलाधर मंडलोई की आत्मकथा ‘जब से आँख खुली हैं’ निजी जीवन-कथा से आगे बढ़कर छिन्दवाड़ा और दमुआ के बार-बार उजड़ते श्रमिक जीवन, अस्थिर रोज़गार, अभावग्रस्त बुनियादी...

गणराज्य का स्वधर्म : कुँवर प्रांजल सिंह

गणराज्य का स्वधर्म : कुँवर प्रांजल सिंह

राजनीति विज्ञानी, सामाजिक कार्यकर्ता और ‘भारत जोड़ो अभियान’ के राष्ट्रीय संयोजक योगेन्द्र यादव की इसी वर्ष प्रकाशित पुस्तक ‘गणराज्य का स्वधर्म’ यूरोपीय मॉडल के एकरूपी राष्ट्रवाद के बरक्स भारत के...

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