गणपत्या की गजब गोष्ठी : अम्बर पाण्डेय
अम्बर पाण्डेय की कविताएँ और कहानियाँ आपने पढ़ी हैं, इधर वह उपन्यास लिख रहें हैं. इस उपन्यास का नायक एक कर्मकांडी पुरोहित है जो धीरे-धीरे अपने को बदलता है. अम्बर...
अम्बर पाण्डेय की कविताएँ और कहानियाँ आपने पढ़ी हैं, इधर वह उपन्यास लिख रहें हैं. इस उपन्यास का नायक एक कर्मकांडी पुरोहित है जो धीरे-धीरे अपने को बदलता है. अम्बर...
आदित्य शुक्ल की यह पहली कहानी है जो समालोचन पर प्रकाशित हो रही है. उनकी कुछ कविताएँ, अनुवाद और गद्य यत्र-तत्र प्रकाशित हुए हैं. महानगर में युवा की ज़िंदगी का...
पल्लवी ने जर्मन भाषा और साहित्य में शोध कार्य किया है. यह कहानी भी जर्मनी के एक शहर की पृष्ठभूमि में घटित होती है. आकार में छोटी है और असर...
हृषीकेश सुलभ की आवाजाही रंगमंच और कथा-लेखन के बीच रही है. नाट्य लेखन के साथ उन्होंने कुछ प्रसिद्ध कृतियों का नाट्य रूपांतरण भी रचा है. तीन कहानी संग्रह प्रकाशित हैं....
नरेश गोस्वामी के कथाकार ने अपने लिए जो प्रक्षेत्र चुना है वह पढ़े लिखे आदर्शवादी युवाओं के मोहभंग और उनकी यातनाओं का है. यह ऐसा इलाका है जो वर्षों से...
अम्बर पाण्डेय की यह तीसरी कहानी है, इसका कथ्य और शिल्प दोनों पिछली कहानियों से अलग है. लम्बे और जटिल वाक्यों का प्रयोग किया गया है. अवास्तविक लगता घटनाक्रम आज...
टॉड फिलिप्स के निर्देशन में बनी फ़िल्म ‘जोकर’ (joker)की चर्चा है और यह उम्मीद की जा रही है कि इसे इस वर्ष का ऑस्कर मिलेगा. मुझे हिंदी के कथाकार विवेक मिश्र...
अम्बर पाण्डेय की कहानी ‘४७१४ नहीं बल्कि ४७११’ एक माह पूर्व समालोचन पर प्रकाशित हुई थी, अब उनकी दूसरी कहानी ‘दादीबई शाओना हिलेल की जीवनी’ प्रस्तुत है. कभी उदय प्रकाश...
"तरुण भटनागर की कहानी ‘प्रलय में नाव' एक अर्थ में पौराणिक कथा का पुनराख्यान कही जा सकती है, जहां नूह के अवतार में एक जुझारु कर्मठ ईश-अनुयायी संहारक शक्तियों के प्रकोप...
उपन्यास ‘अल्पाहारी गृहत्यागी: आई आई टी से पहले’, तथा कहानी संग्रह ‘जाना नहीं दिल से दूर’ से चर्चित अध्येता, लेखक, अनुवादक प्रचण्ड प्रवीर की इधर की प्रकाशित कहानियों ने शिल्प...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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