जोहड़ और पचबीर बाबा: ज्ञान चंद बागड़ी
जोहड़ (पीथलाना,चूरू जिला), साभार: दिव्या खांडल ज्ञान चंद बागड़ी का उपन्यास ‘आखिरी गाँव’ वाणी ने अभी पिछले वर्ष ही प्रकाशित किया है,उनकी एक कहानी ‘बातन के ठाठ’ समालोचन पर छपी और पसंद...
जोहड़ (पीथलाना,चूरू जिला), साभार: दिव्या खांडल ज्ञान चंद बागड़ी का उपन्यास ‘आखिरी गाँव’ वाणी ने अभी पिछले वर्ष ही प्रकाशित किया है,उनकी एक कहानी ‘बातन के ठाठ’ समालोचन पर छपी और पसंद...
हिन्दी के युवा कथाकार कहानी के कथ्य और शिल्प में साहसिक प्रयोग कर रहें हैं, यहीं से कहानी का नया स्वरूप आकार लेगा. समय तो इसमें लगता ही है....
इस अकाल बेला में हिंदी के कथाकार राधाकृष्ण की याद उमड़ी है, हैजा महामारी में हो रही मौतों पर आधारित तथा १९४५ में प्रकाशित उनकी कहानी- ‘एक लाख सतानब्बे हजार...
साहित्य अपने काल में धंस कर लिखा जाता है और अगर उसमें दम होगा तो वह अपने काल को पार करके कालजयी बनेगा. जैसा समय है उसमें अगर आपमें सत्ताओं...
समालोचन पर अविनाश की कहानी ‘जिल्द’, ज्ञानचंद बागड़ी की कहानी ‘संदेश रासक’ आपने पढ़ी, इसी क्रम में सारंग उपाध्याय की कहानी ‘ज़िंदगी लावारिस’ प्रस्तुत है. यह कहानी नशे के नर्क...
(Painting courtesy: Aritra Sen) प्रवासी प्रिय को संदेश भेजने की साहित्य-परंपरा प्राचीन है. पुरानी हिन्दी में रचित अब्दुर्रहमान की कृति संदेश-रासक एक ऐसा ही काव्य है,...
युवा अविनाश लेखन के शुरुआती दौर में हैं, यह कहानी प्रेम, ऊब और अपराधबोध के इर्दगिर्द रची गई है. पठनीय है. आप देखें इसे. कहानीजिल्द ...
अम्बर पाण्डेय की कहानियों ने अपनी पहचान अर्जित की है और उनके अपने पाठक भी तैयार हुए हैं. उष्म भाषा, नवाचारी शिल्प और विचारों की उत्तेजना के बीच उनकी कहानियां...
नया कथाकार अपने साथ अछूता, अपूर्व कथा-संसार भी लाता है. बिजली चोरी के लिए कटिया लगाने वालों की भी अपनी दुनिया है और भीग मांगने वालों के बदरंग संसार में...
‘अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं.’ तो ‘लव’ को सरकारी परीक्षा पास करनी होगी कि वह जेहाद नहीं है. हालाँकि कभी इश्क ही कुफ्र हुआ करता था...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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