सहजि सहजि गुन रमैं : पवन करण
पेंटिग : Rekha Rodwittiya पवन करण २१ वीं सदी की हिंदी कविता के मुख्य स्वरों में हैं. ‘स्त्री मेरे भीतर’ संग्रह का कई भारतीय भाषओं में अनुवाद हुआ है और...
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पेंटिग : Rekha Rodwittiya पवन करण २१ वीं सदी की हिंदी कविता के मुख्य स्वरों में हैं. ‘स्त्री मेरे भीतर’ संग्रह का कई भारतीय भाषओं में अनुवाद हुआ है और...
‘सारिका’ पत्रिका के संपादक रहे अवधनारायण मुद्गल अपनी कहानियों के लिए भी जाने जाते हैं. उनकी जन्मतिथि २८ फरवरी को पड़ती है. इस अवसर पर हरे प्रकाश उपाध्याय का यह...
गुजरात केन्द्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित गोष्ठी (१६-१७ जनवरी/ २०१७), हिंदी कहानी : नई सदी का सृजन और सरोकार’ में पधारे मॉरीशस के वरिष्ठ लेखक राज हीरामन से संवाद का अनुरोध...
प्रत्येक भाषा अपने आप में एक संसार है, उसमें उसके नागरिकों की संस्कृति, ज्ञान, व्यवहार जैसी तमाम जरूरी चीजें रहती हैं. किसी भी भाषा का लुप्त हो जाना उस सभ्यता...
(Waswo X. Waswo : The Flower Seller) सोमप्रभ को उनकी तीक्ष्ण, विवेकसम्मत टिप्पणियों से जानता था. यह भी समझा कि वह एक आवरणहीन खुद्दार युवा हैं. जैसा समय है उस...
पेंटिग : योगेन्द्र चित्रकार अखिलेश का लेखन उनके चित्रों की तरह सुगठित और संवेदनशील है.किसी चित्रकार के गद्य की भाषा इतनी शानदार भी हो सकती है ? ऐसा कभी-कभी देखने...
मोनोलाग (एकालाप) भी नाटक की ही एक विधा है. नाटक में जो जरूरी चीज है वह है नाटकीयता जो उसे ‘लार्जर देन लाइफ’ या ‘लेस देन लाइफ’ बनाती है. वह...
मराठी के युवा कवि रफीक सूरज की कविताएँ पहली बार हिंदी में अनूदित होकर प्रकाशित हो रही हैं. यह महती कार्य किया है भारतभूषण तिवारी ने. मराठी कविता में एंटी...
‘प्राथमिक शिक्षक’ प्रभात की लम्बी कविता है. देश में प्राथमिक शिक्षा की दशा, दुर्दशा को समझने के लिए यह तमाम तरह के सर्वे और रिपोर्ट से कहीं अधिक सटीक और...
प्रोफ़ेसर नित्यानंद तिवारी दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग से आने वाले प्रिय व्याख्याताओं में से हैं, उनकी अपनी आलोचनात्मक जमीन है. हिंदी विभागों में अब ऐसे गुणी, मर्मग्य विवेचकों का...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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