सहजि सहजि गुन रमैं : नूतन डिमरी गैरोला
नूतन डिमरी गैरोला की इन कविताओं में उनकी काव्य – यात्रा का विकास दीखता है. संवेदना और शिल्प दोनों ही स्तरों पर वह परिमार्जित हुई हैं. कविताएँ अनुभवों की सघनता...
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नूतन डिमरी गैरोला की इन कविताओं में उनकी काव्य – यात्रा का विकास दीखता है. संवेदना और शिल्प दोनों ही स्तरों पर वह परिमार्जित हुई हैं. कविताएँ अनुभवों की सघनता...
पेंटिग : Abir Karmakar (Room)प्रारम्भ से ही पहचाने और रेखांकित किये गए पंकज चतुर्वेदी, हिंदी कविता के समकालीन परिदृश्य में अपनी कविता के औदात्य के साथ पिछले एक दशक से...
कहानीउत्तर प्रदेश की खिड़की (प्रिय मित्र सीमा आज़ाद के लिए)विमल चन्द्र पाण्डेयप्रश्न- मेरे घर की आर्थिक हालत ठीक...
हर नया स्वर, हर नई कविता और कवि उम्मीद होते हैं, न सिर्फ भाषा के लिए, जहाँ भाषाएँ बोली जाती हैं उस दुनिया के लिए भी. सुदीप, कवि के रूप...
मिथकों और पुराशिल्पों के अध्ययन और विश्लेषण पर दामोदर धर्मानंद कोसंबी (१९०७-१९६६) ने बेहतरीन कार्य किया है. उनके लिखे शोध निबन्धों की संख्या १०० से भी अधिक हैं. अंग्रेजी में...
समीक्षा हाशिए के समाज का संकट शशिभूषण मिश्रभेम का भेरू मांगता कुल्हाड़ी ईमान, लाल छीट वाली लूगड़ी का सपना, काफ़िर बिजूका उर्फ़ इब्लीस जैसे...
जयश्री रॉय की यह नई कहानी ‘दौड़’ एक बेरोजगार युवक की कहानी है जो हवलदार की नौकरी के लिए तय ५ किलोमीटर की दौड़ तो पूरी कर लेता है पर...
पद्मश्री, साहित्य अकादमी पुरस्कार, रघुवीर सहाय सम्मान आदि से सम्मानित तथा ‘शंखमुखी शिखरों पर’, ‘नाटक जारी है’, ‘इस यात्रा में’, ‘रात अब भी मौजूद है’, ‘बची हुई पृथ्वी’, ‘घबराए हुए...
(रमेश प्रजापति की फेसबुक वाल से साभार)भारतीय ज्ञानपीठ का २८ वां मूर्तिदेवी पुरस्कार प्रसिद्ध आलोचक विश्वनाथ त्रिपाठी की आख्यानपरक कृति व्योमकेश दरवेश को दिया गया है जो आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी...
पेंटिग : हुसैन“ईसा मसीहऔरत नहीं थेवरना मासिक धर्मग्यारह वर्ष की उमर से उनको ठिठकाए ही रखतादेवालय के बाहर !” (मरने की फुर्सत: अनामिका)हिंदी कविता के मानचित्र में अनामिका का अपना...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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