सहजि सहजि गुन रमैं : फरीद खाँ
F. N. Souza (PORTRAIT OF A MAN IN SHADOW)इक्कीसवीं शताब्दी की युवा हिंदी कविता का बीज शब्द है – ‘भय’. यह अपने साये से डर जाने वाला अस्तित्वादी भय नहीं है....
Home » Uncategorized » Page 38
F. N. Souza (PORTRAIT OF A MAN IN SHADOW)इक्कीसवीं शताब्दी की युवा हिंदी कविता का बीज शब्द है – ‘भय’. यह अपने साये से डर जाने वाला अस्तित्वादी भय नहीं है....
पुनीत बिसारिया सिनेमा पर लिखते रहे हैं. २०१३ में प्रकाशित पुस्तक ‘भारतीय सिनेमा का सफरनामा’ चर्चित रही है. हिंदी साहित्य और सिनेमा का रिश्ता अपने शुरूआती दिनों से ही ‘प्यार...
हिंदी अफसानानिगारों में कविता जानी–पहचानी जाती हैं. तीन कहानी संग्रह और दो उपन्यास प्रकाशित हैं. उनकी एक कहानी ‘उलटबांसी’ का अंग्रेजी में तथा कुछ और कहानियों का भारतीय भाषाओँ में...
यात्राएँ इतिहास की हों अगर तो दूर तक जाती हैं, इतिहास के इन सरायों में केवल छूटी हुई स्मृतियां ही नहीं होतीं उनमें बहुत कुछ ऐसा होता है जो वर्तमान...
24 वर्षीय वल्लरी मिरांडा हाउस से इतिहास में आनर्स हैं और स्कूली बच्चों में नेतृत्व विकास के लिए कार्य करती हैं. कविताएँ लिख रही हैं. प्रेम के राग का अनुगमन...
प्रेमचंद गाँधी कवितायेँ लिखते रहे हैं, अनुवाद किया है. नाटकों से निकट का रिश्ता है. कुछ कहानियाँ भी प्रकाशित हुई हैं. संवेदना का सहज और संवेदनशील प्रवाह इस कथा को...
निर्देशक आनन्द एल. राय २०११ में ‘तनु वेड्स मनु’ लाये थे, २०१५ में ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्स’ सिनमा घरों में जहाँ दर्शकों को खींच रही है वहीँ अपनी पठकथा और दृश्य...
तुम चलो सन्त दीदार,सिंगाजी घर हरि को बदावणा. बाबा मनख्या जनम दुरलब है, फिर भोर आवे न दुजी बार...उस सुबह नगजी बा भजन गाते हुए अपने बैल-बक्खर के पीछे चल...
मधुकर भारती की कविताएँ आपको बेचैन करती हैं, अलहदा काव्य-स्वाद से समृद्ध करती हैं. इस बात पर विस्मय होता है कि कैसे हिंदी साहित्य उन्हें अबतक पहचानने और मानने से...
\"पिछले कुछ वर्षों के दौरान हिंदी कथा जगत में जिन कहानीकारों के आमद की धमक साफ़ सुनाई देती है जयश्री रॉय उनमे से एक हैं. उन्होंने अपने लेखन का सफ़र...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
सर्वाधिकार सुरक्षित © 2010-2023 समालोचन | powered by zwantum