निर्मल स्मरण : अनिरुद्ध उमट और मनोज मोहन
रचनाकार समाज की साझी कल्पना को पुनर्निर्मित कर उसे एक साथ जोड़े रखते हैं. और यही बड़ी बात है. आज ...
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रचनाकार समाज की साझी कल्पना को पुनर्निर्मित कर उसे एक साथ जोड़े रखते हैं. और यही बड़ी बात है. आज ...
कवि आशुतोष दुबे के शब्दों में कहें तो, ‘यह एक प्यारी और ज़रूरी किताब है जिसमें हम रचनात्मक संग-साथ की ...
कुछ लेखक अधूरे प्रेम की तरह होते हैं, लौट-लौट कर आते हैं. आकर्षण की तीव्रता मंद नहीं पड़ती. ऐसे ही ...
प्रयोगधर्मी आख्यान- ‘नींद नहीं जाग नहीं’ के बाद कवि अनिरुद्ध उमट की क़िताब ‘वैदानुराग’ इधर प्रकाशित हुई है. उमट आत्मीय ...
‘मैं और मेरी कविताएँ’ स्तम्भ के अंतर्गत समकालीन महत्वपूर्ण कवियों की कविताएँ और वे ‘कविता क्यों लिखते हैं’ विषयक उनका ...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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