जब से आँख खुली है : अनूप सेठी
हिन्दी के वरिष्ठ कवि-लेखक लीलाधर मंडलोई की आत्मकथा ‘जब से आँख खुली हैं’ निजी जीवन-कथा से आगे बढ़कर छिन्दवाड़ा और ...
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महानगरों से हटकर कस्बों और छोटे शहरों में भी स्थानीय लेखकों और नवांकुरों की साहित्यिक सरगर्मियों से आबाद साहित्य के ...
बीसवीं सदी को प्रसिद्ध इतिहासकार एरिक हाब्सबाम ‘अतियों का युग’ कहते हैं. एक भारतीय के लिए बीसवीं सदी के क्या ...
कविताएँ प्रतीकों का इस्तेमाल करती हैं, उन्हें बदल भी देती हैं और उनके सामने प्रतिरोध में खड़ी भी हो जाती ...
‘इस तरह खत्म होती है दुनिया/धमाके से नहीं रिरियाहट से.’ नोबेल पुरस्कार प्राप्त- कवि, आलोचक, नाटककार और संपादक टी एस ...
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