अलक़ाज़ी-पद्मसी परिवार का ज़िन्दगीनामा : पवन करण
फ़ैसल अलक़ाज़ी की पुस्तक ‘अलक़ाज़ी-पद्मसी परिवार की यादें’ का हिंदी अनुवाद राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है. अमितेश कुमार द्वारा ...
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फ़ैसल अलक़ाज़ी की पुस्तक ‘अलक़ाज़ी-पद्मसी परिवार की यादें’ का हिंदी अनुवाद राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है. अमितेश कुमार द्वारा ...
‘मौत की किताब’ और ‘नेमतख़ाना’ के बाद ‘अरसलान और बहज़ाद’ ख़ालिद जावेद का तीसरा उपन्यास है, जो उर्दू से हिंदी ...
गुलाममोहम्मद शेख (1937, सुरेंद्रनगर, गुजरात) केवल चित्रकार ही नहीं, बल्कि कला-चिंतक और लेखक भी हैं. उनकी चित्रकला की बहुस्तरीय कथात्मकता ...
हारुकी मुराकामी का उपन्यास ‘नॉरवेजियन वुड’ मूल जापानी भाषा में 1987 में प्रकाशित हुआ था. इसका अंग्रेज़ी अनुवाद जे. रूबीन ...
अनुराग अनंत के कहानी-संग्रह ‘मुहावरे की मौत’ की चर्चा कवि-लेखक पवन करण कर रहे हैं. यह संग्रह लोकभारती से प्रकाशित ...
‘शिया बटर’, ‘कैफ़े कॉफ़ी डे’, ‘बंकर’ जैसी कहानियों के लेखक कैफ़ी हाशमी का कहानी संग्रह, ‘शिया बटर’ इसी वर्ष लोकभारती ...
युवा कथाकार आयशा आरफ़ीन का पहला कहानी-संग्रह ‘मिर्र’ इसी वर्ष राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है. आयशा आरफ़ीन की कहानियाँ ...
रज़ा की कलाकृतियों को देखना ही नहीं, उनके बारे में पढ़ना भी सम्मोहक अनुभव है. यशोधरा डालमिया की ‘सैयद हैदर ...
पवन करण के कविता संग्रह ‘स्त्री मुग़ल’ की कविताओं में इतिहास, आख्यान और संवेदना का सहमेल है. जिन्हें इतिहास भुला ...
असमति के इस दूसरे अंक में विनोद दास, लीलाधर मंडलोई, नवल शुक्ल, सविता सिंह, पवन करण, प्रभात, केशव तिवारी, प्रभात ...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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