विनोद कुमार शुक्ल और उनकी अंतिम कविता : सुदीप ठाकुर
विनोद कुमार शुक्ल के सहज, लगभग निर्विकार जीवन को वरिष्ठ पत्रकार और लेखक सुदीप ठाकुर ने निकट से देखा है. ...
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विनोद कुमार शुक्ल के सहज, लगभग निर्विकार जीवन को वरिष्ठ पत्रकार और लेखक सुदीप ठाकुर ने निकट से देखा है. ...
यह एक उदास कर देने वाली गाथा है कि सच्चे, आदर्शवादी और बलिदानी लोग किस तरह धीरे-धीरे परिदृश्य से गायब ...
“ऋषि जा चुके थे. मनुष्यों ने देवताओं से पूछा, अब हमारा ऋषि कौन होगा? देवताओं का उत्तर था. अब तर्क ...
कहानी के तत्वों की अधिकतम रक्षा करते हुए, किसी कथा का अपने समय की राजनीति पर ठोस और बहुस्तरीय टिप्पणी ...
मुक्तिबोध को हिंदी आलोचना के केंद्र में स्थापित करने वाली वैचारिक प्रक्रिया में नामवर सिंह का योगदान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है. ...
रचनाकार समाज की साझी कल्पना को पुनर्निर्मित कर उसे एक साथ जोड़े रखते हैं. और यही बड़ी बात है. आज ...
सदियों से भारत जिज्ञासाओं का घर रहा है. अध्येता दूर देशों से दुर्गम यात्राएँ कर यहाँ आते रहे हैं. उनकी ...
ज्ञान अब केवल शक्ति नहीं, ‘धन’ भी है. भारत से बड़ी संख्या में विद्यार्थी विदेशों की ओर रुख कर रहे ...
एली वीज़ल (1928–2016) केवल एक लेखक नहीं, बल्कि इतिहास के सबसे गहरे घाव के जीवित साक्षी थे. होलोकॉस्ट से बच ...
आज जब पुरुषोत्तम अग्रवाल सत्तर वर्ष के हो चुके हैं, उन्हें याद करना अपने प्रिय शिक्षक, मित्र और मार्गदर्शक को ...
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