बिना नाम की उदासियाँ : अंचित
अंचित की यह कविता अपने अँधेरे और आवेग के साथ समकालीन हिन्दी काव्य में प्रकट होने वाली वह आवाज़ है ...
अंचित की यह कविता अपने अँधेरे और आवेग के साथ समकालीन हिन्दी काव्य में प्रकट होने वाली वह आवाज़ है ...
मुक्तिबोध को हिंदी आलोचना के केंद्र में स्थापित करने वाली वैचारिक प्रक्रिया में नामवर सिंह का योगदान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है. ...
हिंदी की आलोचना-परंपरा में रविभूषण उन प्रमुख आवाज़ों में से हैं जिन्होंने अपने साहस और वैचारिक निरंतरता से पाँच दशकों ...
समालोचन के पन्द्रह वर्ष होने पर संपादकीय टिप्पणी और कुछ प्रमुख प्रतिक्रियाएं.
कुछ चीजें ऐसी हैं जिन्हें हम कभी पूरी तरह नहीं जान सकते, जैसे प्रेम. इश्क के दरिया का पानी हर ...
जो स्थान महात्मा गांधी के जीवन में चंपारण का है, वही स्थान सरदार पटेल के जीवन में बारदोली का है. ...
अविनाश मिश्र की ‘धर्मपत्नियाँ’ कविता का एक सिरा पौराणिक है, तो दूसरा समकालीन. कविता इन दोनों के बीच भाव और ...
अभिनेता, निर्देशक, सिने-विद्, लेखक और अनुवादक 79 वर्षीय अरुण खोपकर का जानवरों पर लिखा गया यह अंश अद्भुत और अनूठा ...
वरिष्ठ कथाकार जयशंकर कथा-साहित्य के साथ-साथ कथेतर गद्य में भी अपने आत्मान्वेषी और संवेदनशील लेखन के लिए जाने जाते हैं, ...
अपनी न्यूनतमवादी शैली (मिनिमलिस्ट) और सूक्ष्म भावों के लिए विख्यात फ़्रांसीसी कवयित्री आनी देवू बेर्तलो की कविताओं का हिंदी अनुवाद ...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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