साहित्य ही नहीं कला माध्यमों में भी विश्व स्तर पर बदलाव हो रहें हैं. विश्व-साहित्य से हिंदी-समाज कुछ परिचित है...
Read more'भूलन कांदा’ वनौषधि है, माना जाता है कि इसका स्पर्श मनुष्य को उसके रास्ते से भटका देती है. संजीव बख्शी...
Read moreआश्रम प्राचीन भारतीय अवधारणा है, महात्मा गाँधी ने इसकी सक्रियता का विस्तार करते हुए इसे राजनीति से भी जोड़ा. कलाकारों...
Read more‘कोई दम कल आए थे मज्लिस में 'मीर' /बहुत इस ग़ज़ल पर रुलाया हमें.’ विश्व के महानतम फ़िल्म निर्देशकों में...
Read moreआज विश्व रंगमंच दिवस है (२७ मार्च). खड़ी बोली हिंदी साहित्य की शुरुआत में नाटकों की बड़ी भूमिका थी, इसके...
Read moreकिसी भी पत्रिका के जीवन में ऐसे अवसर आते हैं जब वह कुछ ऐसा प्रकाशित करती है जिसके लिए उसे...
Read moreकला और साहित्य का असर राजनीति की तरह तत्काल नहीं दिखता पर होता गहरा है. सहृदय, विवेकवान और उदार मनुष्यता...
Read moreअंग्रेजी के महानतम कवि-नाटककार शेक्सपीयर की कालजयी कृति ‘मैकबेथ’ में हमेशा से विश्व सिनेमा की रुचि रही है. पिछले वर्ष...
Read moreलता मंगेशकर को स्वर्गीय कहने का मन नहीं करता, उनकी आवाज़ इस नश्वर संसार में अमर है. अपने गीतों में...
Read moreकवि, आलोचक, फ़िल्म मीमांसक, अनुवादक, पत्रकार विष्णु खरे (9 फरवरी 1940–19 सितम्बर 2018) की स्मृति में युवा लेखक प्रचण्ड प्रवीर...
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समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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