रज़ा : जैसा मैंने देखा (२) : अखिलेश
सुप्रसिद्ध चित्रकार सैयद हैदर रज़ा (२२ फरवरी,१९२२–२३ जुलाई, २०१६) के व्यक्तित्व, कृतित्व और स्मृतियों पर आधारित श्रृंखला ‘रज़ा : जैसा मैंने देखा’ के इस दूसरे भाग में चित्रकार अखिलेश ने रज़ा...
सुप्रसिद्ध चित्रकार सैयद हैदर रज़ा (२२ फरवरी,१९२२–२३ जुलाई, २०१६) के व्यक्तित्व, कृतित्व और स्मृतियों पर आधारित श्रृंखला ‘रज़ा : जैसा मैंने देखा’ के इस दूसरे भाग में चित्रकार अखिलेश ने रज़ा...
समालोचन प्रसिद्ध चित्रकार सैयद हैदर रज़ा (२२ फरवरी,१९२२–२३ जुलाई, २०१६) पर आधारित श्रृंखला ‘रज़ा : जैसा मैंने देखा’ शुरू कर रहा है. चित्रकार और लेखक अखिलेश का यह स्तम्भ रज़ा...
प्रसिद्ध चित्रकार अखिलेश (जन्म : २८ अगस्त, १९५६) हिंदी के समर्थ लेखक और अनुवादक भी हैं. मक़बूल फ़िदा हुसैन की जीवनी, मार्क शगाल की आत्मकथा का अनुवाद, तथा ‘अचम्भे का...
सैयद हैदर रज़ा (२२ फरवरी १९२२ – २३ जुलाई २०१६) की आज पुण्यतिथि है. एक महान चित्रकार और साहित्य का अनुरागी, हिंदी कविता से उनका रिश्ता प्रगाढ़ था. अब जब...
चित्रकार, कलाकार, विचारक और कवि जगदीश स्वामीनाथन (जून २१, १९२८ – १९९४) के शिष्य विवेक टेंबे ने अपने उस्ताद के संग-साथ को इधर लिखना शुरू किया है. यह संस्मरण अप्रतिम...
आइडिया ऑफ़ समालोचन यह था/है कि यह निरी साहित्य की ही पत्रिका न रहे दूसरे सामाजिक अनुशासनों से भी संवादरत रहे और कला के दीगर माध्यमों से भी जुड़ी रहे....
(Photo Credit S. Subramanium)“मेरे अन्दर एक तरह का नैरन्तर्य (रहता) है”(मरहूम चित्रकार ‘रामकुमार के साथ पीयूष दईया का संवाद’ से) भारत के श्रेष्ठम अमूर्त चित्रकार (23 सितम्बर, 1924 – 14...
आदिवासी कलाकार जनगढ़ सिंह श्याम निगाता (जापान) शहर के एक छोटे से गाँव में जहाँ वह हासेगावा के साथ रहते थे, एक दिन कमरे में मृत पाए गए. उनके पास...
प्रसिद्ध प्रतीकवादी अमूर्त चित्रकार प्रभाकर बर्वे ने अपने चाचा मूर्ति शिल्पकार वी. पी. करमारकर और फिल्मों से जुड़े अपने पिता से बहुत कुछ सीखा. जे. जे. स्कूल ऑफ आर्ट्स से...
चित्रकार, कलाकार, विचारक और कवि जगदीश स्वामीनाथन (June 21, 1928 – 1994) का जन्म शिमला में बसे तमिल परिवार में हुआ था. वे कांग्रेस सोशलिष्ट पार्टी और फिर कम्युनिष्ट पार्टी...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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