आलेख

भारतीय अकादमिक स्वतंत्रता और फ्रेंचेस्का ओर्सिनी : त्रिभुवन

भारतीय अकादमिक स्वतंत्रता और फ्रेंचेस्का ओर्सिनी : त्रिभुवन

सदियों से भारत जिज्ञासाओं का घर रहा है. अध्येता दूर देशों से दुर्गम यात्राएँ कर यहाँ आते रहे हैं. उनकी यह दीर्घ और अटूट परम्परा आज भी हमारे बौद्धिक जीवन...

पीएच.डी. की दुनिया: भारत बनाम अमेरिका : रविन्द्र कुमार

पीएच.डी. की दुनिया: भारत बनाम अमेरिका : रविन्द्र कुमार

ज्ञान अब केवल शक्ति नहीं, ‘धन’ भी है. भारत से बड़ी संख्या में विद्यार्थी विदेशों की ओर रुख कर रहे हैं— एक आँकड़े के अनुसार, वर्ष 2024 में लगभग साढ़े...

2025 का साहित्य का नोबेल पुरस्कार: त्रिभुवन

2025 का साहित्य का नोबेल पुरस्कार: त्रिभुवन

साहित्य के नोबेल पुरस्कार की प्रतीक्षा पूरी दुनिया करती है, और हिंदी साहित्य तो इसकी प्रतीक्षा 1913 से ही कर रहा है. रवींद्रनाथ ठाकुर को उनके कविता-संग्रह ‘गीतांजलि’ के लिए...

प्रेमचंद: प्रदूषण एवं स्वास्थ्य का सवाल : शुभनीत कौशिक

प्रेमचंद: प्रदूषण एवं स्वास्थ्य का सवाल : शुभनीत कौशिक

जहाँ शिक्षा और आलोचनात्मक सोच को पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं मिलता, वहाँ पर्यावरणीय ही नहीं, बौद्धिक प्रदूषण भी समान गति से बढ़ता है. इसका लगातार बढ़ना यह बताता है कि भारत...

हिन्द स्वराज : पाठ और पुनर्पाठ : रूबल

हिन्द स्वराज : पाठ और पुनर्पाठ : रूबल

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की आज 156वीं जयंती है और पूरी दुनिया उनकी स्मृति में ‘अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ मना रही है. ‘संवाद’ गांधी जी के जीवन और दर्शन का सार है...

साहित्य में भटकते हुए : अशोक वाजपेयी

साहित्य में भटकते हुए : अशोक वाजपेयी

यह वक्तव्य साहित्य में ७५ वर्षों से भटकते उस व्यक्ति का है जो साहित्य से कभी भटका नहीं. इस भटकने में वह कला के दूसरे रूपों, संस्थाओं तक उमड़-घुमड़ कर...

पादरी विलियम बायर, नेटफ्लिक्स और मेरी दादी : तृप्ति श्रीवास्तव

पादरी विलियम बायर, नेटफ्लिक्स और मेरी दादी : तृप्ति श्रीवास्तव

औपनिवेशिक सत्ता हमेशा उपनिवेशित की छवि गढ़कर उसे बर्बर और हीन साबित करती रही है. इसी तर्क से उसने अपने शासन को वैध ठहराया है. भारतीय स्त्रियाँ इस रणनीति का...

औपनिवेशक ज्ञान मीमांसा और आरंभिक भारतीय विद्वता : माधव हाड़ा

औपनिवेशक ज्ञान मीमांसा और आरंभिक भारतीय विद्वता : माधव हाड़ा

पराधीन भारत में निर्मित और सृजित ज्ञान पर औपनिवेशिक प्रभाव का होना स्वाभाविक था. यह प्रभाव उपनिवेश को स्थायी बनाए रखने की औपनिवेशिक रणनीति के साथ कितनी दूर तक चला,...

रेत समाधि : अशोक महेश्वरी

रेत समाधि : अशोक महेश्वरी

2018 में प्रकाशित गीतांजलि श्री के पाँचवें उपन्यास ‘रेत-समाधि’ के डेज़ी रॉकवेल द्वारा किए गए अंग्रेज़ी अनुवाद ‘Tomb of Sand’ ने 2022 में अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार प्राप्त करके इतिहास रच...

कविता के लिए अविश्वसनीय उपहार : जयप्रकाश सावंत

कविता के लिए अविश्वसनीय उपहार : जयप्रकाश सावंत

1912 से शिकागो से प्रकाशित हो रही ‘पोएट्री’ नामक पत्रिका का निरंतर प्रकाशन किसी चमत्कार से कम नहीं है. यह इस बात का जीवंत प्रमाण है कि एक प्रबुद्ध समाज...

Page 2 of 38 1 2 3 38

फ़ेसबुक पर जुड़ें