आलेख

शीला रोहेकर और यहूदी गाथा: नवीन जोशी

शीला रोहेकर और यहूदी गाथा: नवीन जोशी

हिंदी साहित्य में यहूदी लेखकों की संख्या गिनी चुनी रही है, वर्तमान में शीला रोहेकर एकमात्र हिंदी की यहूदी लेखिका हैं. दिनांत’ और ‘ताबीज़’ के अलावा ‘मिस सैम्युएल: एक यहूदी...

अष्टभुजा शुक्ल की कविताओं में दाम्पत्य प्रेम:  सदाशिव श्रोत्रिय         

अष्टभुजा शुक्ल की कविताओं में दाम्पत्य प्रेम:  सदाशिव श्रोत्रिय        

कवि अष्टभुजा शुक्ल की दाम्पत्य- प्रेम की कविता- ‘आज की रात’ और ‘बहुत बेचैन हिया’ जिनके प्रकाशन में लगभग एक दशक का अंतराल है, का चयन यहाँ सदाशिव श्रोत्रिय ने...

बांग्ला स्त्री-आत्मकथाएं: गरिमा श्रीवास्तव

बांग्ला स्त्री-आत्मकथाएं: गरिमा श्रीवास्तव

ब्रिटिश काल में बंगाल राष्ट्रवाद के उदय और सामाजिक-धार्मिक सुधारों का महत्वपूर्ण स्रोत था, उसका गहरा असर हिंदी प्रदेशों पर भी पड़ा. ऐसे में उस समय की बांग्ला स्त्रियाँ किस...

डॉ. सूर्यनारायण रणसुभे: जीवन और स्वप्न: रवि रंजन

डॉ. सूर्यनारायण रणसुभे: जीवन और स्वप्न: रवि रंजन

शरण कुमार लिंबाले के ‘अक्करमाशी’, और लक्ष्मण गायकवाड के ’उठाईगीर’ से हिंदी के पाठक परिचित हैं, पर इनके अनुवादक ‘सूर्यनारायण रणसुभे’ से अंजान. मराठी और हिंदी का बहुत पुराना नाता...

जायसी कृत ‘चित्ररेखा’ और उसकी कथा: माधव हाड़ा

जायसी कृत ‘चित्ररेखा’ और उसकी कथा: माधव हाड़ा

महाकवि मलिक मुहम्मद जायसी के महाकाव्य पद्मावत की प्रसिद्धि इतनी अधिक है कि उसकी तुलना में उनकी अन्य कृतियों की तरफ ध्यान नहीं जाता है. ‘चित्ररेखा’ उनकी ऐसी ही कृति...

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की अधिकृत जीवनी: प्रीति चौधरी

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की अधिकृत जीवनी: प्रीति चौधरी

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ सरकारों की तानाशाही के ख़िलाफ़  अब प्रतीक बन चुके हैं, जहाँ-जहाँ भी ज़ुल्म व सितम होते हैं उनकी कविताएँ पोस्टर और नारों की शक्ल में लहराने लगती हैं....

तेजिमोला से मूलान तक: हमारी कथाओं की स्त्रियाँ: प्रीति प्रकाश

तेजिमोला से मूलान तक: हमारी कथाओं की स्त्रियाँ: प्रीति प्रकाश

हमारी लोक कथाओं में स्त्रियों की उपस्थिति ख़ासी समस्यामूलक है. लैंगिक समानता और व्यक्तित्व के स्वतंत्र विकास के लिहाज़ से भी इनमें दिक्कतें हैं. प्रीति प्रकाश ने लोक कथाओं को...

स्मरण: वीस्वावा शिम्बोर्स्का और उनकी कविताएँ: हरिमोहन शर्मा

स्मरण: वीस्वावा शिम्बोर्स्का और उनकी कविताएँ: हरिमोहन शर्मा

शिम्बोर्स्का को साहित्य के लिए १९९६ का नोबेल पुरस्कार जब मिला, हिंदी में भी उनकी चर्चा बड़े स्तर पर आरम्भ हुई और उनकी कविताओं के अनुवाद प्रकाशित होने लगे. १९९८...

कबीर: ‘पीव क्यूं बौरी मिलहि उधारा’: सदानन्द शाही

कबीर: ‘पीव क्यूं बौरी मिलहि उधारा’: सदानन्द शाही

सदानन्द शाही का इधर रैदास बानी का काव्यान्त्रण ‘मेरे राम का रंग मजीठ है’ प्रकाशित हुआ है. गोरख, कबीर, रैदास उनकी रूचि के विषय हैं. कबीर को सम्बोधित उन्होंने कविताएँ भी...

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