आलेख

रचना और आलोचना: भूपेंद्र बिष्ट

रचना और आलोचना: भूपेंद्र बिष्ट

भूपेंद्र बिष्ट ने नामवर सिंह पर कथाकार धीरेंद्र अस्थाना के लेख के संदर्भ में रचना और आलोचना के अंतर-सम्बन्धों पर यह टिप्पणी लिखी है. प्रस्तुत है.

उत्तराखण्ड में नवलेखन-4: बटरोही

उत्तराखण्ड में नवलेखन-4: बटरोही

मुख्यधारा के समानांतर अनेक धाराएँ चलती हैं, मुख्यधारा इन्हीं से जीवन पाती है. हिंदी का साहित्य ही इन्हीं उपधाराओं से बना है. इन उपधाराओं की अलग से भी पहचान होनी...

‘वीरेनियत’ का मतलब: पंकज चतुर्वेदी

‘वीरेनियत’ का मतलब: पंकज चतुर्वेदी

‘इतने भले नहीं बन जाना साथी/जितने भले हुआ करते हैं सरकस के हाथी’ वीरेन डंगवाल के पहले कविता संग्रह, ‘इसी दुनिया में’ यह कविता शामिल है. इसका असर कुछ ऐसा...

क्या प्रेमचन्द की परम्परा इकहरी थी? : विमल कुमार

क्या प्रेमचन्द की परम्परा इकहरी थी? : विमल कुमार

साहित्य और संस्कृति में परम्परा और उत्तराधिकार के सवाल अक्सर सरलीकरण के आखेट हो जाते हैं. भाषा और साहित्य की दुनिया उसके लिखने-बोलने वालों से आबाद है जो कि अपने...

उत्तराखण्ड में नवलेखन-3: बटरोही

उत्तराखण्ड में नवलेखन-3: बटरोही

उत्तराखण्ड में नवलेखन की तीसरी कड़ी में वरिष्ठ लेखक बटरोही अरुण कुकसाल और शम्भू राणा की चर्चा कर रहें हैं. उत्तराखण्ड के युवा लेखन में विविधता है. जड़ों से जुड़े...

गुलज़ार: चढ़े तो मुहब्बत, उतरे तो ख़ुशबू:  कौशलेन्द्र

गुलज़ार: चढ़े तो मुहब्बत, उतरे तो ख़ुशबू: कौशलेन्द्र

‘जय हो’ गीत के लिये ऑस्कर पुरस्कार प्राप्त और दादा साहब फाल्के आदि सम्मानों से सम्मानित हिंदी, उर्दू और पंजाबी में लिखने वाले कवि सम्पूरण सिंह कालरा ‘गुलज़ार’ (१८ अगस्त...

उत्तराखण्ड में नवलेखन-2: बटरोही

उत्तराखण्ड में नवलेखन-2: बटरोही

वरिष्ठ लेखक बटरोही के लेखन में उत्तराखण्ड की संस्कृति और उसकी सामाजिक बुनावट की गहरी समझ मिलती है. नवलेखन की दूसरी कड़ी में अनिल कार्की और सुभाष तराण की चर्चा...

गुलेरी जी ने क्या कहा था? विमल कुमार

गुलेरी जी ने क्या कहा था? विमल कुमार

चन्द्रधर शर्मा गुलेरी (7 जुलाई 1883 - 12 सितम्बर 1922) का आज स्मरण दिवस है. हिंदी साहित्य को आधुनिक और विवेक-सम्मत बनाने के जो नवजागरणकालीन सांस्कृतिक उद्यम हुए उनमें गुलेरी...

उत्तराखण्ड में नवलेखन:  बटरोही

उत्तराखण्ड में नवलेखन: बटरोही

वरिष्ठ कथाकार बटरोही उत्तराखण्ड की साहित्यिक-सांस्कृतिक संपदा को अपनी लेखनी का विषय बनाते रहें हैं. उनके लेखन में साहित्य, इतिहास, स्मृति, लोक और व्यक्तिगत संस्मरण घुलमिल कर आते हैं. इस...

प्रतिपक्ष का बुद्धिजीवी: राजाराम भादू

प्रतिपक्ष का बुद्धिजीवी: राजाराम भादू

राजेन्द्र यादव (28 अगस्त, 1929-28 अक्तूबर, 2013) ने ‘हंस’ मासिक पत्रिका का 1986 से 2013 तक संपादन किया. हिंदी साहित्यिक पत्रकारिता के क्षेत्र में यह समय ‘हंस’ की केन्द्रीयता और...

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