आलोचना

पितृ-वध : आशुतोष भारद्वाज

(sculpture by great ketelaars)पुत्र एक समय के बाद पिता बन जाता है. क्या वह पिता को अपदस्त करके पिता बनता है ? सत्ता के लिए पुत्र द्वारा पिता का वध...

सावित्रीबाई फुले की कविताई : बजरंग बिहारी तिवारी

महान सुधारक सावित्रीबाई फुले कवयित्री भी थीं. उनके मराठी में दो संग्रह प्रकाशित हुए- ‘काव्यफुले’ (१८५४) तथा ‘बावन्नकशी सुबोधरत्नाकर’ (१८९१).‘क्रांतिज्योति’ सावित्रीबाई फुले की कविताएँ औपनिवेशिक भारत में  समाजिक-धार्मिक क्रान्ति की...

उपन्यास के भारत की स्त्री (चार) : आशुतोष भारद्वाज

(Amrita Shergil : Self-portrait)‘उपन्यास के भारत की स्त्री’ के अंतर्गत अब प्रस्तुत है समापन क़िस्त ‘स्त्री का एकांत: अपूर्णता का विधान’. इससे पहले आपने पढ़ा है -(एक) ‘आरंभिका : हसरतें और...

उपन्यास के भारत की स्त्री (तीन) : आशुतोष भारद्वाज

(by DianeFeissel voilee)मुहम्मद हादी रुसवा ने ‘उमराव जान अदा’ उपन्यास में तवायफ उमराव की कथा कह दी, कम लोग जानते हैं रुसवा के दूसरे उपन्यास ‘जुनून-ए-इंतजार’ (१८९९) में इसी उमराव...

उपन्यास के भारत की स्त्री (दो) : आशुतोष भारद्वाज

(by Annem Zaidi)उपन्यासों के उदय को राष्ट्र-राज्यों की निर्मिति से जोड़ कर देखा जाता है. ‘वंदे मातरम्’ उपन्यास की ही देन है. आशुतोष भारद्वाज भारत के प्रारम्भिक उपन्यासों में स्त्री...

उपन्यास के भारत की स्त्री (एक) : आशुतोष भारद्वाज

( by Rabindranath Tagor)उपन्यासों को आधुनिक युग का महाकाव्य कहा जाता है. आधुनिकता, जनतंत्र और राष्ट्र-राज्यों के उदय से उनका गहरा नाता है, स्त्रियों की सामजिक गतिशीलता के बगैर उपन्यास संभव...

दलित साहित्य – २०१८ : बजरंग बिहारी तिवारी

हिंदी का दलित साहित्य अब कलमी पौधा न होकर एक भरा पूरा वृक्ष है. सिर्फ आत्मकथाएं नहीं, उपन्यास, कहानी, कविता, अनुवाद आलोचना सभी क्षेत्रों में आत्मविश्वास और परिपक्वता दिखती है....

सबद भेद : सेवासदन : हुस्न का बाज़ार या सेवा का सदन : गरिमा श्रीवास्तव

१०० वर्ष पूर्व प्रकाशित ‘सेवासदन’ को कथाकार प्रेमचंद का ‘पहला मुख्य उपन्यास’ माना जाता है, इस शताब्दी वर्ष में इसका गंभीर विवेचन-विश्लेषण होना चाहिए. ‘Illegitimacy of Nationalism: Rabindranath Tagore and...

रामविलास शर्मा का कवि-कर्म: रवि रंजन

रामविलास शर्मा का कवि-कर्म: रवि रंजन

रामविलास शर्मा बड़े आलोचक हैं, १९४३ तक वह एक उदीयमान कवि भी थे. सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ ने ‘तार सप्तक’ में उन्हें इसीलिए शामिल भी किया था. हालाँकि रामविलास शर्मा...

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