मिथकीय पात्रों को केंद्र में रखकर सृजनात्मक लेखन अतीत का वर्तमान के सन्दर्भ में पुनर्लेखन है, कथाकार किरण सिंह शोध-अन्वेषण...
कवियों पर कविताएँ कवि लिखते रहें हैं. ‘पुरस्कारों की घोषणा’ में रंजना मिश्रा ने कवियों पर जो मीठी चुटकी ली...
अंकिता आनंद ‘आतिश’नाट्य समिति और \"पीपल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स’की सदस्य हैं. इससे पहले उनका जुड़ाव सूचना के अधिकार के...
लेखिका और विचारक अरुंधति रॉय की किताब ‘The Doctor and the Saint’ का हिंदी अनुवाद अनिल यादव ‘जयहिंद’ और रतन...
कोई तो रंग है’ और ‘अगन जल’ संग्रहों के कवि विनोद पदरज (13 फरवरी 1960-सवाई माधोपुर) का तीसरा संग्रह ‘देस’...
प्रभात की कविताओं पर लिखते हुए अरुण कमल ने माना है कि ‘यह हिंदी कविता की उंचाई भी है और...
(sculpture by great ketelaars)पुत्र एक समय के बाद पिता बन जाता है. क्या वह पिता को अपदस्त करके पिता बनता...
अदनान कफ़ील दरवेश की कविता ‘क़िबला’ को २०१८ के ‘भारत भूषण अग्रवाल’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, आलोचक ‘पुरुषोत्तम...
भारतेंदु हरिश्चन्द्र को हिंदी उसी तरह प्यार करती है जिस तरह बांग्ला रबीन्द्रनाथ टैगोर से. असहमतियां रबीन्द्र से भी हैं...
उपन्यास : कुठाँव अब्दुल बिस्मिल्लाहसंस्करण - २०१९ राजकमल प्रकाशन प्रा. लि. नई दिल्लीमूल्य : ४९५ पत्रकार और एक्टिविस्ट अली अनवर की बिहार के...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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