आज हरजीत (१९५९-१९९९) होते तो अपना ६२वां जन्म दिन अपने यारों के साथ मना रहे होते. इस मकबूल शायर और...
‘वापसी’ जैसी कालजयी कहानियों के अलावा ‘पचपन खंभे लाल दीवारें’, ‘रुकोगी नहीं राधिका’, ‘शेषयात्रा, ‘अंतर्वंशी’,‘भया कबीर उदास’, ‘नदी’, \'अल्पविराम\' आदि...
भाष्य के अंतर्गत समालोचन महत्वपूर्ण रचनाओं का पुनर्पाठ प्रस्तुत करता है, जिसमें आपने अब तक- निराला, मुक्तिबोध, शमशेर बहादुर सिंह,...
अंतहीन पन्नों की कॉपी के किसी कोरे पन्ने पर यह जो आज तिथि अंकित की गयी है, उसे नव वर्ष...
कथाकार और पहल पत्रिका के यशस्वी संपादक ज्ञानरंजन की क़िताब ‘उपस्थिति का अर्थ’ इसी वर्ष सेतु प्रकाशन से छप कर...
भक्तिकाल के कवियों का समूह विरक्त लोगों का नहीं था, धर्म के राजनीतिक आशय को वे लोग ख़ूब समझते थे....
अदब में नस्लें कैसे संवारी जाती हैं ? एक बड़ा लेखक किस तरह से अपनी भाषा के युवा से संवाद...
नई सदी में समय के हिसाब से तो अभी दो दशक ही गुज़रे हैं लेकिन जिन प्रवृत्तियों से कोई सदी...
राहुल द्विवेदी की कुछ कविताएँ २०१७ में समालोचन में प्रकाशित हुईं थीं. इस बीच बहुत कुछ घटित हुआ उनके जीवन में...
लेखक, आलोचक, शोधकर्ता और संपादक शम्सुर्रहमान फ़ारुक़ी (३० सितम्बर, १९३५ - २५ दिसम्बर २०२०) उर्दू और अंग्रेजी में लिखते थे....
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