फ़रवरी की कविता: लोकेश मालती प्रकाश
फ़रवरी की कविता की संरचना समय को रैखिक न मानकर अनुभूतिगत बनाती है. यह नया ऋतु-शृंगार तो है, पर एक जटिल रूपक भी है. यह प्रत्याशा का वह प्रदेश है,...
फ़रवरी की कविता की संरचना समय को रैखिक न मानकर अनुभूतिगत बनाती है. यह नया ऋतु-शृंगार तो है, पर एक जटिल रूपक भी है. यह प्रत्याशा का वह प्रदेश है,...
अदनान कफ़ील दरवेश की कविताओं में इसी दुनिया-जहान के मुड़े-तुड़े, तीखे-नुकीले और रिसते हुए घाव हैं. प्रतिकार का एक सजग, उठा हुआ हाथ है. साथ ही उस जगह की दैनंदिनी...
मीर-जी ज़र्द होते जाते हो/क्या कहीं तुमने भी किया है इश्क़?’. “I love you as certain dark things are to be loved, in secret, between the shadow and the soul.”...
प्रेम तिथियों का मोहताज़ नहीं. वह सर्द दिनों में भी अंकुरित हो जाता है और पतझर में भी खिल सकता है. प्रेम ने कभी कैलेंडर नहीं देखा. हाँ, दिनांक ने...
आमिर हमज़ा वर्षों से एक लगातार शोक गीत हैं. वह इसे लिखे जा रहे हैं. तरह-तरह से. यह शोक समय का है. एक खुला घाव है. असुविधाजनक चुप्पियाँ और रोज़मर्रा...
युवा कवयित्री गुंजन उपाध्याय पाठक की इन कविताओं में रूपक अनुभव में बदल जाते हैं और अतिशयोक्तियाँ यथार्थवादी औज़ार बन जाती हैं. खुरदरी भाषा एक नैतिक असुविधा पैदा करती है,...
अपमान कोई आकस्मिक या अपने में स्वतंत्र घटना नहीं है. वह विभिन्न रूपों में, विभिन्न स्थलों पर घटित होता रहता है और प्रायः उन्हीं स्वरों पर गिरता है जिन्हें सत्ता...
जनवरी की पहली तारीख़ विनोद कुमार शुक्ल के जन्म की भी तिथि है। तेईस वर्ष की अवस्था में उनकी कविताएँ पहली बार ‘कृति’ के सितंबर, 1960 अंक में प्रकाशित हुई...
सत्यव्रत रजक की कुछ नई कविताएँ प्रस्तुत हैं.
‘कंगले और चरित्रहीन होते हैं लेखक!’. ऐसी आत्मभर्त्सना केवल कविता ही अपने लिए लिख सकती है. देवेश पथ सारिया की इन कविताओं में युवा का वही पुराना दर्द है जो...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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