अशोक वाजपेयी की कुछ नई कविताएँ
निराशा, आत्मलोचन और नैतिक व्यथा के बीच वरिष्ठ कवि अशोक वाजपेयी की ये कविताएँ अपने समय को दर्ज करने के अपने दायित्व का बखूबी निर्वहन करती हैं. क्षुब्धता भी कैसे...
निराशा, आत्मलोचन और नैतिक व्यथा के बीच वरिष्ठ कवि अशोक वाजपेयी की ये कविताएँ अपने समय को दर्ज करने के अपने दायित्व का बखूबी निर्वहन करती हैं. क्षुब्धता भी कैसे...
विनय सौरभ सजग, संवेदनशील और अभिधा की शक्ति पर भरोसा करने वाले कवि हैं. आम जीवन में छिपी विडम्बना और हिंसा को उजागर करती उनकी कविताएँ मर्म को छूती हैं...
इस वर्ष सपना भट्ट को उनके दूसरे कविता-संग्रह 'भाषा में नहीं' के लिए 'शीला सिद्धांतकर स्मृति पुरस्कार' से सम्मानित किया गया है. यहाँ उनकी कुछ कविताएँ प्रस्तुत हैं. कामना, पीड़ा,...
श्रीकांत वर्मा (18 सितम्बर 1931 – 25 मई 1986) का आज स्मरण-दिवस है. उन्हें याद करते हुए उनकी एक लगभग अलक्षित कविता प्रस्तुत की जा रही है, जो ‘धर्मयुग’ के...
72 वर्षीय कवि-लेखक शैलेन्द्र चौहान की इन कविताओं में हमारे समय की ऐसी सच्चाइयाँ हैं, जिनसे हमारा सामना प्रतिदिन होता है, और वे इतनी आमफ़हम हैं कि रोज़मर्रा के जीवन...
यूनुस एमरे (1238–1320) तुर्की और समूची सूफ़ी परंपरा के सबसे महत्वपूर्ण कवियों में गिने जाते हैं. उनकी कविताओं में प्रेम, विरह, धर्म और मनुष्यता अत्यंत मार्मिक और गहरे रूप में...
वरिष्ठ कवयित्री अनामिका की कविताओं में परम्परा और लोक के तत्व मार्मिकता के उत्स रहे हैं. एक घायल पुकार जब तब उठती रहती है. यह विदीर्ण स्त्री की आवाज़ है...
अश्विनी कुमार टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज़ में प्रोफ़ेसर हैं. वर्तमान में वे यूनिवर्सिटी ऑफ़ इंडियानापोलिस में विज़िटिंग प्रोफ़ेसर हैं. पिछले वर्ष अंग्रेज़ी में उनका कविता-संग्रह ‘मैप ऑफ़ मेमोरीज़’ प्रकाशित...
सत्तर के क़रीब पहुँच गए वरिष्ठ कवि कुमार अम्बुज का आज जन्मदिन है. स्वस्थ और सक्रिय जीवन की हार्दिक शुभकामनाएँ. जैसा समय और जिस तरह की क्रूरताओं में हमारा संसार...
वरिष्ठ कवयित्री सविता सिंह की नई कविताएँ युद्ध की पृष्ठभूमि में सत्ता, परिवार और प्रकृति के जुड़े जटिल तथा परस्पर गुथे अस्तित्वगत संकटों को स्त्री-दृष्टि की तीक्ष्णता से भी देखती...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
सर्वाधिकार सुरक्षित © 2010-2026 समालोचन | powered by zwantum