कास्ट आयरन की इमारत : अम्बर पाण्डेय
हिंदी कहानी में बहुत कुछ बदल रहा है. नई सदी की कथा-शैली की विशेषताओं में एक है ऐतिहासिक पात्रों की उपस्थिति. कथाकार संदर्भित काल-खंड की भाषा और व्यवहार को अनुसंधान...
हिंदी कहानी में बहुत कुछ बदल रहा है. नई सदी की कथा-शैली की विशेषताओं में एक है ऐतिहासिक पात्रों की उपस्थिति. कथाकार संदर्भित काल-खंड की भाषा और व्यवहार को अनुसंधान...
प्रवीर ने उपनिषदों के विचार को केंद्र में रखते हुए लम्बी कहानियाँ लिखनी शुरू की है जिनमें से कुछ आपने समालोचन पर पढ़ी हैं. मुण्डक उनकी नई कहानी है. वैसे तो...
‘बातन के ठाठ’ के लेखक ‘ज्ञान चंद बागड़ी’ राजस्थान के एक समुदाय की कथा बुनते है, ज़ाहिर तौर पर न यहाँ अस्मिता विमर्श है न स्त्री-वाद. लेकिन कहानी अंततः उस...
अम्बर पाण्डेय की कहानियां इधर आप पढ़ रहें हैं. अम्बर अपने को तरह-तरह से अनेक विधाओं में अभिव्यक्त कर रहें हैं. यह कहानी उनकी पिछली कहानियों के बनिस्बत आकार में...
जननायक कृष्णवीरेन्द्र सारंगराजकमल प्रकाशन प्रा. लि.१-बी नेताजी सुभाष मार्ग, दरियागंजनई दिल्ली - ११०००२संस्करण : २०१९मूल्य : २९९ (पेपरबैक) वीरेन्द्र सारंग का यह नया उपन्यास इस मायने में महत्त्वपूर्ण है कि यह...
पेंटिग : Salman Toorइरशाद ख़ान सिकन्दर शायर हैं और उनके दो संग्रह भी प्रकाशित हैं. इधर कहानियाँ भी लिख रहें हैं. भाषा अच्छी और चुस्त है. कहानी पढ़ा ले जाती है....
प्रचण्ड प्रवीर बीहड़ प्रतिभा के धनी कथाकार हैं. कथा को दर्शन में गूँथ कर दर्शन के समानांतर ‘मर्डर मिस्ट्री’ की कहानी है ‘प्रश्न’. उपनिषदों को आधार बनाकर लिखी जा रही...
भारत और चीन के बीच हमेशा तिब्बत रहता है. भले ही उसका ज़िक्र हो न हो. इस समय भी तिब्बत बुदबुदा रहा है, धीरे-धीरे ही सही. प्रसिद्ध कथाकार तरुण भटनागर...
केशव प्रसाद मिश्र के उपन्यास ‘कोहबर की शर्त’ पर आधारित फ़िल्म ‘नदिया के पार’ पूर्वी उत्तर-प्रदेश और भोजपुरी भाषी इलाकों में बहुत लोकप्रिय हुई थी. ख़ासकर चन्दन और गुंजा का...
नरेश गोस्वामी की कहानियाँ आकार में बड़ी नहीं होती हैं, कथ्य उनका सघन और अक्सर चुभने वाला होता है. कहानियों के उच्च-बौद्धिक पात्र समाज और परिवार में अक्सर अपने आप को...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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