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अंचित की कविताएँ

(photo courtesy DEBMALYA RAY CHOUDHUR)“ओ मेरी भाषामैं लौटता हूं तुम मेंजब चुप रहते-रहतेअकड़ जाती है मेरी जीभदुखने लगती हैमेरी आत्मा” ...

अंचित की कविताएँ

 कालजयी रचनाकार काल को इसीलिए जीत लेते हैं कि उनसे हमेशा अंकुर फूटते रहते हैं, उनमें यह संभावना रहती है. ...