कुन फ़यकुन : दीपक त्रिपाठी
बतौर कवि आमिर हमज़ा वर्षों से पढ़े और सराहे जा रहे हैं. उनके संग्रह ने उन्हें एक साथ पढ़ने की ...
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बतौर कवि आमिर हमज़ा वर्षों से पढ़े और सराहे जा रहे हैं. उनके संग्रह ने उन्हें एक साथ पढ़ने की ...
आमिर हमज़ा अच्छे कवि तो हैं ही, संकलन और संपादन में भी कल्पनाशील हैं. हिंदी, उर्दू और फ़ारसी के 25 ...
आमिर हमज़ा वर्षों से एक लगातार शोक गीत हैं. वह इसे लिखे जा रहे हैं. तरह-तरह से. यह शोक समय ...
आमिर हमज़ा द्वारा संपादित पुस्तक ‘क्या फ़र्ज़ है कि सबको मिले एक सा जवाब’ अभी हाल ही में हिंदी युग्म ...
सुदूर प्रक्षेत्रों में जहाँ पीठ और परम्पराएँ नहीं हैं. साहित्य किस तरह अंकुरित होता है, पनपता और पसरता है? इसे ...
आमिर हमज़ा की प्रस्तुत कविताएँ उनके कवि व्यक्तित्व को और पुख़्ता करती हैं. कविता की सूक्ष्मता का निर्वाह है. आंतरिक ...
युवा आमिर हमज़ा की काव्य-संभावनाएं उनकी पिछली कविताओं में मुखर थीं, इस लम्बी कविता में उनका सामर्थ्य देखा जा सकता ...
‘उत्सव का पुष्प नहीं हूँ’ अनुराधा सिंह का दूसरा कविता संग्रह है जिसे वाणी ने प्रकाशित किया है. वरिष्ठ लेखिका ...
शोक इस दशक की हिंदी कविता का बीज शब्द है, इधर प्रकाशित अधिकतर संग्रहों की कविताओं में उसकी उदासी देखी ...
मूर्तिकार अपने शिल्प में डूबा हुआ ख़ुद में डूब जाता है. रचनात्मकता भी अध्यात्म है. सृजनात्मक लोगों को अलग से ...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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