चंद्रभूषण से महेश मिश्र की बातचीत
जैसा समय चल रहा है, उसमें गंभीर, प्रमाणिक और आलोचनात्मक लेखन की जगह न केवल सिकुड़ती जा रही है, बल्कि ...
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जैसा समय चल रहा है, उसमें गंभीर, प्रमाणिक और आलोचनात्मक लेखन की जगह न केवल सिकुड़ती जा रही है, बल्कि ...
भोजपुरी क्षेत्र की मौखिक परम्परा की प्रसिद्ध लोकगाथा ‘लोरिकायन’ के लोरिक–चंदा प्रेम-प्रसंग की पुनर्रचना चौदहवीं सदी में मुल्ला दाउद ने ...
साहित्य और इतिहास का संबंध अनुकरण या प्रतिबिंब का नहीं है. यह एक जटिल अंतःसंवाद है, जिसमें इतिहास साहित्य के ...
आमतौर पर यह माना जाता रहा है कि भारत में बौद्ध धर्म क्रमशः अवनति की ओर बढ़ता हुआ अंततः विलुप्त ...
भारतीय लोक-वृत्त में प्रसारित कथाओं, पर्वों और अनुष्ठानों पर आलोचनात्मक चिंतन का सूत्रपात औपनिवेशिक भारत में हुआ, देशी और विदेशी ...
अश्वघोष का ‘बुद्धचरित’ धार्मिक ही नहीं, साहित्यिक दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है. यह एक ऐसा महाकाव्य है, जो भारत में ...
लगभग पचास ईसवी पूर्व के महान कवि अश्वघोष की कृति ‘बुद्धचरित’ के महत्व से आज विश्व सुपरिचित है. दुर्भाग्य से ...
साल समाप्ति पर है. लेखकों की दुनिया किताबों की दुनिया है. पाठक अपने प्रिय लेखकों को पढ़ते हैं और लेखक ...
पुरानी पोथियों की तलाश, मिलान और पाठ-निर्धारण की प्रक्रिया में हिंदी में पाठालोचन (Textual criticism) की शुरुआत हुई थी पर ...
भिन्न भाषाओं के उपन्यासों के तुलनात्मक अध्ययन के लिए दोनों की संस्कृति, समाज और राजनीति से अद्यतन होना आवश्यक होता ...
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