कटघरे में आलोचना और उसका पक्ष : विनोद तिवारी
आलोचना प्रारम्भ से ही हिंदी साहित्य के केंद्र में रही है. श्रेष्ठ का मूल्यांकन और प्रगतिशील तत्वों की पहचान के ...
आलोचना प्रारम्भ से ही हिंदी साहित्य के केंद्र में रही है. श्रेष्ठ का मूल्यांकन और प्रगतिशील तत्वों की पहचान के ...
ग़ालिब (1797-1869) का जीवन भी उनकी शायरी की ही तरह परतदार है. न उनकी शायरी पूरी खुलती है न वह. ...
प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका कलापिनी कोमकली देवास में रहती हैं. उनसे यह अनौपचारिक बातचीत संदीप नाईक ने उनके घर पर ही ...
लोक गीतों में लोक अपने को गाता है. एक ऐसा गान जिसके कोरस में सबके कंठ शामिल रहते हैं. कवि ...
लगभग पचास ईसवी पूर्व के महान कवि अश्वघोष की कृति ‘बुद्धचरित’ के महत्व से आज विश्व सुपरिचित है. दुर्भाग्य से ...
प्रसिद्ध लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने अवधी, ब्रज, भोजपुरी, काशिका और बुन्देलखड़ी बोलियों के गीतों को देश-प्रदेश में अपने मोहक ...
रील आज महामारी की तरह है. जो संक्रमित हैं उनमें से अधिकतर इसके वाहक बन जाते हैं और यह बढ़ता ...
वरिष्ठ कवि रुस्तम की इन कविताओं को प्रेम कविताएँ कह सकते हैं. यह प्रेम गहरा है और इसलिए थिर. हलचल ...
युवा आलोचक सन्तोष अर्श का यह आलेख जितना कृष्णा सोबती पर है उतना ही आज के भारतीय लोकतंत्र पर भी. ...
साहित्यकार वैसे ही अपने अंदर चल रहे अंतहीन मुक़दमों के वादी-प्रतिवादी की भूमिका में रहते हैं. पर कभी-कभी उन्हें बाहर ...
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