आलेख

अरुण कोलटकर (3): अरुण खोपकर

अरुण कोलटकर (3): अरुण खोपकर

अरुण कोलटकर जैसे कवि-कलाकार किसी भाषा में कभी-कभी ही संभव होते हैं. वह दो भाषाओं में एक साथ हुए. ऐसे कवियों को समझने वाले भावक भी दुर्लभ ही होते हैं....

अरुण कोलटकर (2) : अरुण खोपकर

अरुण कोलटकर (2) : अरुण खोपकर

अरुण बालकृष्ण कोलटकर (1 नवंबर, 1932 - 25 सितंबर 2004) मराठी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं के महत्वपूर्ण कवि हैं. उनकी कविताओं की निर्मिति को बारीकी से अरुण खोपकर ने समझा...

अरुण कोलटकर: अरुण खोपकर

अरुण कोलटकर: अरुण खोपकर

अरुण बालकृष्ण कोलटकर (1 नवंबर, 1932 - 25 सितंबर 2004) विश्व के बड़े कवियों में से एक हैं. वह कबीर के बाद एकमात्र भारतीय कवि हैं जिन्हें ‘न्यूयॉर्क रिव्यू ऑफ...

सरहपा का सौन्दर्य: निरंजन सहाय

सरहपा का सौन्दर्य: निरंजन सहाय

चौरासी सिद्धों में से कुछ ही सिद्धों के विषय में थोड़ा बहुत हम जानते हैं. सरहपा उन्हीं में से एक हैं. उनका व्यक्तित्व और लेखन दोनों क्रांतिकारी है. निश्चय ही...

लेखन और चिंतन का स्त्री-अध्याय: रविभूषण

लेखन और चिंतन का स्त्री-अध्याय: रविभूषण

वरिष्ठ आलोचक रविभूषण का यह आलेख स्त्री-चिंतन और लेखन पर निगाह डालता है. प्रारंभ, परम्परा और विकास दर्ज करता है. विश्व के स्त्री-विचारकों और लेखकों को समझते और संदर्भित करते...

मनुष्य और प्रकृति के अद्वैत की कहानियाँ : नरेश गोस्वामी

मनुष्य और प्रकृति के अद्वैत की कहानियाँ : नरेश गोस्वामी

वरिष्ठ कथाकार अशोक अग्रवाल की प्रकृति से मनुष्य के एकात्म पर आधारित चार कहानियों पर समाज विज्ञानी और कथाकार नरेश गोस्वामी का यह आलेख बेहद दिलचस्प है. यह कहानियों को...

जीवनानन्द दाश : एक उदास  कवि: कल्लोल चक्रवर्ती

जीवनानन्द दाश : एक उदास कवि: कल्लोल चक्रवर्ती

वरिष्ठ लेखक-संपादक गिरधर राठी जीवनानन्द दाश की कालजयी कविता ‘वनलता सेन’ के विषय में लिखते हैं, ‘दशकों से, अर्थ विवेचन से अधिक इस कविता का नाद सौंदर्य, इसका संगीत, और...

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