समीक्षा

कई चाँद थे सरे आसमां: गोपाल प्रधान

कई चाँद थे सरे आस्माँ (उपन्यास)लेखक : शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ीउर्दू से अनुवाद : नरेश ‘नदीम’प्रकाशक : पेंगुइन बुक्स,इंडिया/यात्रा बुक्ससंस्करण : २०१०. मूल्य : ४७५.पृष्ठ संख्या :७४८शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी :: (१९३५. आजमगढ़)उर्दू के शीर्षस्थ आलोचकसाहित्य...

शिगाफ़ : सुमन केशरी

शिग़ाफ़ : दरारों पर पुल बनाने की कोशिशसुमन केशरी राजकमल से २०१० में प्रकाशित मनीषा कुलश्रेष्ठ के  उपन्यास शिगाफ पर जिज्ञासा द्वारा आयोजित परिचर्चा में सुमन केशरी का आलेख. कृति...

रावी लिखता है : अब्दुल बिस्मिल्लाह

रावी लिखता है(उपन्यास)अब्दुल बिस्मिल्लाह .प्रथम संस्करण-2010.मूल्य-200 रूपए.राजकमल प्रकाशन, दरियागंज, नई दिल्ली-02ग्लोबल मुस्लिम जगत के बयानपुखराज जाँगिड़अब्दुल बिस्मिल्लाह  का नया उपन्यास ‘रावी लिखता है’ (2010) पहली बार ‘बया’ (दिसंबर 2007) में हिंदी में तथा अनुदित रूप में...

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