सत्यव्रत रजक की कविताएँ
सत्यव्रत रजक की कुछ नई कविताएँ प्रस्तुत हैं.
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सत्यव्रत रजक की कुछ नई कविताएँ प्रस्तुत हैं.
‘कंगले और चरित्रहीन होते हैं लेखक!’. ऐसी आत्मभर्त्सना केवल कविता ही अपने लिए लिख सकती है. देवेश पथ सारिया की ...
नेहा नरूका की कविताएँ सत्ता और सर्वसम्मति के समकालीन गठजोड़ को प्रश्नांकित करती हैं. उस नैतिक तनाव में आकार लेती ...
शुभम नेगी के पास कहने के लिए बहुत कुछ है, और वे उसे तरह-तरह से कहते हैं. कहानियों से, फ़िल्मों ...
रूटीन की निरर्थकता भी एक सामाजिक आत्महत्या ही है. आत्महत्या के विचार की सुरंग में प्रवेश करती बाबुषा कोहली की ...
कलाएँ निजी अनुभवों को सहजता से सामूहिक ठिकानों में रूपांतरित कर देती हैं. पीड़ा, विस्थापन और आकांक्षा एक बड़े सांस्कृतिक ...
पुरबियों का निर्वासन एक ऐसी आपदा है जिसे गाने के लिए भिखारी ठाकुर को एक शैली ही विकसित करनी पड़ ...
अंचित की यह कविता अपने अँधेरे और आवेग के साथ समकालीन हिन्दी काव्य में प्रकट होने वाली वह आवाज़ है ...
अविनाश मिश्र की ‘धर्मपत्नियाँ’ कविता का एक सिरा पौराणिक है, तो दूसरा समकालीन. कविता इन दोनों के बीच भाव और ...
संख्याओं की ऊब से शब्द पैदा हुए होंगे, और आज फिर सब कुछ संख्याओं में बदल रहा है. हमारी असफलता ...
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