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भौतिक संसाधनों पर कब्ज़े की होड़ ने साम्राज्यवाद को जन्म दिया. नतीजतन, अनेक देश उसकी चपेट में आकर गुलाम बने....
Read moreजीविका के लिए श्रम करना केवल मनुष्य की ही नहीं, प्रत्येक प्राणी की मूल प्रवृत्ति है. भारतीय सभ्यता संभवतः एकमात्र...
Read moreअरुणेश नीरन पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थे, पर यूँ चले जायेंगे ऐसा लगता नही था. जो उनको जानते हैं....
Read moreभाषाओं के विवाद कितने गम्भीर और निर्णायक होते हैं इसे भारतीय महाद्वीप से अधिक और कौन समझ सकता है? अभी...
Read moreअसमति के इस दूसरे अंक में विनोद दास, लीलाधर मंडलोई, नवल शुक्ल, सविता सिंह, पवन करण, प्रभात, केशव तिवारी, प्रभात...
Read moreसमालोचन ‘असहमति की सौ कविताएँ’ के अपने विशेष अंक का यह पहला हिस्सा प्रस्तुत कर रहा है. इसमें सच, साहस...
Read moreमहात्मा गांधी की अनुपस्थिति उनकी स्मृतियों से भरी हुई है. यह बताता है कि वह अभी वैचारिक रूप से ज़िन्दा...
Read moreमहात्मा गांधी का ‘ब्रह्मचर्य प्रयोग’ गांधीवादियों को भी नहीं जचता था, अधिकतर संशय से देखते थे, कुछ ने बाद में...
Read more30 जनवरी, 1948 को महात्मा गांधी की सुनियोजित हत्या कर दी गयी. भारतीय समाज पर पिता की हत्या का यह...
Read more2022 की श्रेष्ठ पुस्तकें कौन-कौन सी हैं? इससे सार्थक मुझे यह लगा कि 2022 में किन किताबों को पढ़ा गया...
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समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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