आलोचना

नामवर सिंह का छात्र-जीवन : रविभूषण

नामवर सिंह का छात्र-जीवन : रविभूषण

यह नामवर सिंह (28 जुलाई, 1926-19 फ़रवरी, 2019)का जन्मशताब्दी वर्ष है और आज उनकी पुण्यतिथि भी है. वरिष्ठ आलोचक रविभूषण का यह आलेख नामवर सिंह के छात्र-जीवन का विवेचन करते...

मध्यकाल पर तीन उपन्यास : चंद्रभूषण

मध्यकाल पर तीन उपन्यास : चंद्रभूषण

साहित्य और इतिहास का संबंध अनुकरण या प्रतिबिंब का नहीं है. यह एक जटिल अंतःसंवाद है, जिसमें इतिहास साहित्य के हाथों पुनर्रचित होता है. घटना, जब संवेदना से अनुप्राणित होती...

‘अंधेरे में’ और नामवर सिंह : कृष्ण समिद्ध

‘अंधेरे में’ और नामवर सिंह : कृष्ण समिद्ध

मुक्तिबोध को हिंदी आलोचना के केंद्र में स्थापित करने वाली वैचारिक प्रक्रिया में नामवर सिंह का योगदान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है. उनके कवि, कथाकार, आलोचक और पत्रकार रूपों पर व्यापक चर्चा...

हमने ‘अभिव्यक्ति के सारे ख़तरे’ नहीं उठाये : रविभूषण 

हमने ‘अभिव्यक्ति के सारे ख़तरे’ नहीं उठाये : रविभूषण 

हिंदी की आलोचना-परंपरा में रविभूषण उन प्रमुख आवाज़ों में से हैं जिन्होंने अपने साहस और वैचारिक निरंतरता से पाँच दशकों से मार्क्सवादी-आलोचना को ज़िन्दा रखा हुआ है. ‘फ़ासीवाद की दस्तक’,...

पुरुषोत्तम अग्रवाल की आलोचना दृष्टि : आनंद पांडेय

पुरुषोत्तम अग्रवाल की आलोचना दृष्टि : आनंद पांडेय

आज जब पुरुषोत्तम अग्रवाल सत्तर वर्ष के हो चुके हैं, उन्हें याद करना अपने प्रिय शिक्षक, मित्र और मार्गदर्शक को याद करना है. यह उनके बौद्धिक महत्व और आलोचनात्मक हस्तक्षेप...

स्त्री-भाषा : रोहिणी अग्रवाल

स्त्री-भाषा : रोहिणी अग्रवाल

एक ऐसे समय में, जब सोशल मीडिया के कारण चित्त की चंचलता बढ़ी है, एकाग्रता की अवधि घट गई है, और गंभीर पठन को रीलों के तूफ़ान ने लगभग अपदस्थ...

अमरकांत की कहानियाँ : आनंद पांडेय

अमरकांत की कहानियाँ : आनंद पांडेय

कथाकार अमरकांत (1925–2014) की यह जन्मशती है. आज ही के दिन, 1925 में उनका जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद के भगमलपुर गाँव में हुआ था. उन्हें प्रेमचंद की यथार्थवादी...

कटघरे में आलोचना और उसका पक्ष : विनोद तिवारी

कटघरे में आलोचना और उसका पक्ष : विनोद तिवारी

आलोचना प्रारम्भ से ही हिंदी साहित्य के केंद्र में रही है. श्रेष्ठ का मूल्यांकन और प्रगतिशील तत्वों की पहचान के अपने दायित्व को उसने हमेशा याद रखा है. कहना न...

इतिहास-चेतना, राजनीति-दर्शन और उपन्यास : रोहिणी अग्रवाल

इतिहास-चेतना, राजनीति-दर्शन और उपन्यास : रोहिणी अग्रवाल

इतिहास के सबक हम भूल जाते हैं, सत्ता जिसका चरित्र बदलता नहीं और भविष्य जिसे ये दोनों अक्सर बंधक बना लेते हैं. वरिष्ठ आलोचक रोहिणी अग्रवाल का यह गहन आलेख...

साही की कविता : पंकज चतुर्वेदी

साही की कविता : पंकज चतुर्वेदी

रामविलास शर्मा ‘तार सप्तक’ के कवि थे और विजयदेव नारायण साही ‘तीसरे सप्तक’ के. पर आलोचना ने उन्हें अपना बना लिया. सप्तकों की ही बात करें तो अज्ञेय, मुक्तिबोध और...

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