आलोचना

स्त्री-दर्पण: नवजागरण और स्त्री-पत्रकारिता: गरिमा श्रीवास्तव

‘स्त्री-दर्पण’ पत्रिका का प्रकाशन जून १९०९ में प्रयाग से शुरू था इसकी संपादिका रामेश्वरी देवी नेहरू और प्रबंधक कमला देवी नेहरू थीं. इसमें स्त्री मुद्दों पर सामाजिक राजनीतिक लेख छपते...

तुलसी का आत्मसंघर्ष और कवितावली: प्रेमकुमार मणि

तुलसी का आत्मसंघर्ष और कवितावली: प्रेमकुमार मणि

गोस्वामी तुलसीदास के इर्द-गिर्द भक्ति/धर्म/अस्मिता का ऐसा प्रभा मंडल तैयार किया गया है कि कवि तुलसी अलक्षित रह जाते हैं. हम भूल जाते हैं कि उनका जीवन कवि का था...

शमशेर बहादुर सिंह का काव्य रहस्य और सौंदर्य के भयावह फूल: सविता सिंह

शमशेर बहादुर सिंह का काव्य रहस्य और सौंदर्य के भयावह फूल: सविता सिंह

आज प्रस्तुत है शमशेर बहादुर सिंह की हिंदी की ‘बड़ी’ प्रेम कविता ‘टूटी हुई, बिखरी हुई’ का स्त्रीवादी पाठ. सविता सिंह ख़ुद हिंदी की महत्वपूर्ण कवयित्री हैं. शमशेर की ‘शमशेरियत’...

मैला आँचल में राजनीति की बारादरी: अमरेन्द्र कुमार शर्मा

मैला आँचल में राजनीति की बारादरी: अमरेन्द्र कुमार शर्मा

‘फणीश्वरनाथ रेणु जन्म शताब्दी वर्ष’ में रेणु के लेखन की व्याख्या, विचार, पुनर्विचार की कोशिशें बड़े स्तर पर हो रहीं हैं. उनकी राजनीति पर कुछ दिन पूर्व आपने समालोचन पर...

रेणु की राजनीति : प्रेमकुमार मणि

यह फणीश्वरनाथ रेणु का जन्म शताब्दी वर्ष है, रेणु के लेखन के विविध आयामों को समझने के प्रयास हो रहें हैं. उनकी राजनीतिक चेतना क्या थी, किस तरह से इसने...

कहानीकार फणीश्वरनाथ रेणु : प्रेमकुमार मणि

फणीश्वरनाथ रेणु के जन्म शताब्दी वर्ष के सिलसिले में समालोचन प्रेमकुमार मणि का रेणु की कहानियों पर आधारित यह आलेख प्रस्तुत कर रहा है. रेणु की कहानियां ग्रामीण कामगार और...

क्या आचार्य रामचंद्र शुक्ल जातिवादी और साम्प्रदायिक हैं ? प्रेमकुमार मणि

आचार्य रामचंद्र शुक्ल हिंदी साहित्य के इतिहास-लेखन  और आलोचना के क्षेत्र में अभी भी शीर्ष पर हैं. बिना उनसे वाद–विवाद के आप हिंदी साहित्य से संवाद नहीं कर सकते. उनपर...

मुस्लिम स्त्रियों की आत्मकथाएं : गरिमा श्रीवास्तव

मुस्लिम स्त्रियों की आत्मकथाएं : गरिमा श्रीवास्तव

प्रो. गरिमा श्रीवास्तव का शोध आलेख ‘चुप्पियाँ और दरारें’ मुस्लिम स्त्रियों की आत्मकथाओं का विस्तृत विश्लेषण विवेचन करता है, इनमें साहित्य, संस्कृति और राजनीति से जुड़ी प्रसिद्ध स्त्रियाँ भी शामिल...

पंकज बिष्ट की कहानियाँ : राकेश बिहारी

‘समयांतर’ के संपादक पंकज बिष्ट (जन्म : २० फरवरी, १९४६) का आज ७५ वां जन्म दिन है. पांच दशकों की उनकी रचनात्मक और वैचारिक यात्रा के विविध आयाम हैं- कहानियाँ,...

आख्यान-प्रतिआख्यान (१):अग्निलीक(हृषीकेश सुलभ):राकेश बिहारी

यूरोप में राष्ट्र राज्य-और उपन्यासों का उदय साथ-साथ हुआ, लोकतंत्रात्मक समाज की ही तरह उपन्यासों में भी तरह-तरह के पात्र आपस में भिन्न विचारों के साथ संवादरत रहते हैं. भारत...

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