‘हम एक जैसे होने के बजाय भिन्न रहते हुए एक दूसरे को ज़्यादा बेहतर ढंग से समझ सकते हैं’. धार्मिक...
लोग थर्रा गए जिस वक़्त मुनादी आयीआज पैग़ाम नया ज़िल्ले इलाही देंगे.परवीन शाकिर का यह शेर इधर मुझे बार –...
किसी भी कवि की कविता को समझने के लिए सह्रदयता की आवश्यकता होती है. आम जन सैकड़ो वर्षो से भक्ति-काल...
कथाकार तरुण भटनागर द्वारा यूजेन आयोनेस्क के नाटक ‘लैसन’ के हिंदी अनुवाद ‘पाठ’ पर यह वक्तव्य पढ़ने योग्य है.किताब : तरुण भटनागर ...
हिन्दी में प्रेम–कवितायें कम हैं, ब्रेक-अप पर तो नहीं के बराबर. युवा कवयित्री बाबुषा कोहली की लंबी कविता ‘ब्रेक-अप’ इस...
पुरुषोत्तम अग्रवाल की कहानी 'नाकोहस' पर राकेश बिहारी का आलेख- 'कहानी कहने की दुविधा और मजबूरी के बीच' आपने पढ़ा. अपने आलोचनात्मक...
कहानी कहने की दुविधा और मजबूरी के बीच...(संदर्भ : पुरुषोत्तम अग्रवाल की कहानी ‘नाकोहस’) राकेश बिहारी वरिष्ठ आलोचक और नवोदित कथाकार...
कबीर के अपढ़ होने को स्थापित तथ्य माना जाता है. किसने स्थापित किया, क्यों किया और क्या वास्तव में कबीर...
फोटो आभार : Anusha Yadavआज राजेन्द्र यादव का जन्म दिवस है, उनकी अनुपस्थिति में उनका पहला जन्मोत्सव. सभ्यता की चेतना और...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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