चंदायन : एक और अधूरी किताब : चंद्रभूषण
भोजपुरी क्षेत्र की मौखिक परम्परा की प्रसिद्ध लोकगाथा ‘लोरिकायन’ के लोरिक–चंदा प्रेम-प्रसंग की पुनर्रचना चौदहवीं सदी में मुल्ला दाउद ने ‘चंदायन’ के रूप में की, जो अवधी भाषा में रचित...
भोजपुरी क्षेत्र की मौखिक परम्परा की प्रसिद्ध लोकगाथा ‘लोरिकायन’ के लोरिक–चंदा प्रेम-प्रसंग की पुनर्रचना चौदहवीं सदी में मुल्ला दाउद ने ‘चंदायन’ के रूप में की, जो अवधी भाषा में रचित...
आमतौर पर यह माना जाता रहा है कि भारत में बौद्ध धर्म क्रमशः अवनति की ओर बढ़ता हुआ अंततः विलुप्त हो गया. उस दौर के रचे गए नाटकों की विवेचना...
राजनीति एक आधुनिक अवधारणा है, पर इससे जुड़ी वैचारिक परंपरा प्राचीन है. यूरोप से लेकर भारत तक इसकी अवधारणात्मक यात्रा और अर्थ-परिवर्तनों की लहरें केवल भाषिक विकास का इतिहास नहीं...
जो स्थान महात्मा गांधी के जीवन में चंपारण का है, वही स्थान सरदार पटेल के जीवन में बारदोली का है. चंपारण ने गांधी को ‘महात्मा’ बनाया, और बारदोली ने पटेल...
पराधीन भारत में कुम्भ की व्यवस्था ब्रिटिश शासन के अधीन थी. मेले से तत्कालीन सरकार को व्यय से कई गुना अधिक राजस्व की प्राप्ति होती थी. यह स्वाधीनता संघर्ष का...
जिसे हम हिंदी साहित्य का आदिकाल कहते हैं और जिसमें बौद्ध, नाथ, जैन और लौकिक साहित्य की नदियाँ बहती हैं. उनमें अभी ऐसा बहुत कुछ है जिसका अनुसंधान शेष है....
महेश कुमार इधर हिंदी की आदिवासी कविताओं पर कार्य कर रहें हैं. उनके आलेखों ने ध्यान खींचा है. उनकी दृष्टि और तैयारी दिखती है. संस्कृति और इतिहास के संदर्भ में...
प्रकाशन व्यवसाय है. साहित्य का प्रकाशन भी व्यवसाय ही है. ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि पाठकों की अभिरुचियों, क्रय शक्ति आदि के आकड़े उपलब्ध हों जिससे इस...
हिंदी साहित्य के इतिहास-लेखन की परम्परा फ्रेंच भाषा के गार्सां द तासी के ‘इस्त्वार द ल लितरेत्यूर ऐंदूई ऐ ऐंदूस्तानी (1839) से आरम्भ हुई मानी जाती है. इसके बाद हिंदी...
गरिमा श्रीवास्तव का स्त्री-विमर्श से सम्बन्धित शोध और लेखन महत्वपूर्ण है. वह लगातार इस दिशा में अग्रसर हैं, स्त्री इतिहास के उन पन्नों को प्रकाश में ला रहीं हैं जिनपर...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
सर्वाधिकार सुरक्षित © 2010-2023 समालोचन | powered by zwantum