कविताओं के कथ्य और शिल्प में जब बदलाव सामूहिकता में लक्षित हों तब उसे नये नाम से पुकारने की जरूरत...
अनंत में 1,670 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घूमती पृथ्वी पर मनुष्य अपने अस्तित्व को लेकर इतना आश्वस्त है...
पिछले वर्ष संभावना प्रकाशन से विनोद पदरज का चौथा कविता संग्रह- ‘आवाज़ अलग अलग है’ प्रकाशित हुआ था, दुर्योग से...
कविताएँ प्रतीकों का इस्तेमाल करती हैं, उन्हें बदल भी देती हैं और उनके सामने प्रतिरोध में खड़ी भी हो जाती...
वरिष्ठ आलोचक-लेखक रवि रंजन की पोलैंड की राजधानी वारसा प्रवास की साक्षी यह ‘वारसा डायरी’ संस्मरण और डायरी लेखन के...
अन्तोन चेख़फ़ (29 जनवरी,1860 -15 जुलाई,1904) की कहानियां आज भी पाठकों पर गहरा असर छोड़ती हैं. कौशलेन्द्र पेशे से चिकित्सक...
नेहल शाह, फ़िजिओथेरेपिस्ट हैं, भोपाल में रहती हैं. कविताएँ लिखतीं हैं और कला के क्षेत्र में रुचि रखती हैं. उनकी...
हिंदी में असंगतता (Absurd) के साहित्य के प्रस्तोता भुवनेश्वर की अपनी ख़ुद की कहानी कम त्रासद नहीं है. विराट प्रतिभाएं...
समझ में नहीं आता कि माध्यम को दोष दिया जाए कि जिनके हाथों में वह है उन्हें. टीवी की शुरुआत...
अनुराधा सिंह की निर्वासित तिब्बती कविताओं पर आधारित पुस्तक ‘ल्हासा का लहू’ वाणी प्रकाशन ने रज़ा फ़ाउण्डेशन के सहयोग से...
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