समालोचन पर नये वर्ष की शुरुआत कविताओं से करते हुए प्रस्तुत हैं- सुरेन्द्र प्रजापति. सुरेन्द्र प्रजापति गया जिले के ‘असनी’...
वाणी प्रकाशन से २०२१ में प्रियंका नारायण की पुस्तक ‘किन्नर: सेक्स और सामाजिक स्वीकार्यता’ प्रकाशित हुई है. प्रियंका ने किन्नरों...
संस्मरण लिख रहें हैं जिनमें से कुछ आपने समालोचन पर ही पढ़े हैं. प्रस्तुत संस्मरण दो पालतू कुत्तों पर हैं...
समकालीन प्रमुख कथाकार तरुण भटनागर के उपन्यासों- ‘लौटती नहीं जो हँसी’, ‘राजा, जंगल, और काला चाँद’ तथा ‘बेदावा’ पर आधारित...
शिरीष कुमार मौर्य की कविताएँ पढ़ते हुए सृजनात्मकता के विविध रंग और रूप कुछ इस तरह से उद्घाटित होते हैं...
आलोचक वैभव सिंह इधर कहानियाँ भी लिख रहें हैं, साहित्य की विधाओं के बीच यह आवाजाही स्वागतयोग्य है. प्रस्तुत कहानी...
भाषा की दुनिया अपार अनंत है, नाना तरह की चीजें उसमें घटित होती रहती हैं. साहित्य तो उसका एक हिस्सा...
दो चर्चित कहानी संग्रहों के बाद प्रवीण कुमार का यह पहला उपन्यास है- ‘अमर देसवा’ जो कोरोना में आम आदमी...
विश्व प्रसिद्ध आलोचक-अनुवादक हरीश त्रिवेदी का हिंदी साहित्य से गहरा नाता रहा है, वह हिंदी में भी लिखते रहें हैं....
कथाकार और ‘तद्भव’ पत्रिका के यशस्वी संपादक अखिलेश का यह आलेख आत्म के विविध आयामों से गुजरते हुए उसकी रचनात्मक...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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