औपनिवेशिक भारत में मजदूरों को भारत से दूर देशों में खटने के लिए ले जाया जाता था जहाँ वे अकथ...
जेल की यातनाओं और अनुभवों पर प्रचुर मात्रा में देशी विदेशी भाषाओं में साहित्य मिलता है. नेताओं, क्रांतिकारियों, कार्यकर्ताओं और...
‘शब्दों का देश’ राकेश मिश्र का चौथा कविता संग्रह है जिसे राधाकृष्ण प्रकाशन ने इसी वर्ष प्रकाशित किया है. इस...
आज मंगलेश डबराल की पुण्यतिथि है, पिछले वर्ष आज ही के दिन वह हमसे हमेशा के लिए जुदा हो गये...
किसी भी पत्रिका के लिए किसी युवा को प्रस्तुत करना ख़ास ख़ुशी का अवसर होता है. सहृदय समाज के समक्ष...
‘प्रेम जितना करुणामय रहा/प्रेमी उतना ही निर्मम’. ‘नो नेशन फ़ॉर वुमन’ की लेखिका और बीबीसी की पत्रकार प्रियंका दुबे की...
लगभग तीन दशकों से कथा-आलोचना और स्त्री-चेतना के क्षेत्र में सक्रिय रोहिणी अग्रवाल की दस से अधिक आलोचनात्मक कृतियाँ प्रकाशित...
पूनम वासम की कविताएँ निर्मला पुतुल की परम्परा का विकास लगती हैं. आदिम संस्कृति की सहज मार्मिकता, छले जाने का...
लगभग पौने दो सौ साल पहले स्पानी (स्पेनिश भाषा) में लिखे गये सेराफिन एस्तेबानेज कल्देरों के ‘Escenas andaluzas’ के एक...
सुपरिचित कथाकार तरुण भटनागर के कहानी संग्रह ‘प्रलय में नांव’ की समीक्षा कर रहें हैं- रमेश अनुपम. शीर्षक कहानी के...
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