सदानंद शाही की कविताएँ
गांधी जी का हिंदी और साहित्य से गहरा रिश्ता रहा है, उनपर बड़े कवियों ने कविताएँ लिखीं हैं. अभी भी उनपर कविताएँ लिखी जा रहीं हैं. ‘गांधी सप्ताह’ के इस...
गांधी जी का हिंदी और साहित्य से गहरा रिश्ता रहा है, उनपर बड़े कवियों ने कविताएँ लिखीं हैं. अभी भी उनपर कविताएँ लिखी जा रहीं हैं. ‘गांधी सप्ताह’ के इस...
प्रिया वर्मा की कविताओं पर टिप्पणी में देवीप्रसाद मिश्र ने ‘पितृपक्षीय गार्हस्थ्य को उजाड़ने के आग्रहों से भरी’ कहते हुए अवधी की देशज उपस्थिति को भी रेखांकित किया है. यह...
प्रिया वर्मा की कविताएँ इधर उभर कर सामने आयीं हैं. वे लगातार लिख रहीं हैं. हिंदी कविता में अब दशक बीतते-बीतते नयी काव्य प्रवृत्तियाँ और शिल्पगत प्रयोग समाने आने लगे...
विष्णु खरे ने समालोचन पर ही एक जगह लिखा था- ‘महेश वर्मा उन प्रतिभावान युवा कवि-कवयित्रियों में से हैं जिनकी रचनाओं का मैं स्वयं को बहुत उम्मीद, उत्सुकता और उत्तेजना...
देवी प्रसाद मिश्र हिंदी के विरल और विशिष्ट कवि हैं. कवि-कर्म के प्रति अंतिम सीमा तक प्रतिबद्ध हैं. उनकी कविताओं में अनवरत अन्वेषण और प्रयोग का सिलसिला आपको दिखेगा. कविता...
शचीन्द्र आर्य की प्रस्तुत कविताओं की ताज़गी अलग दिखने के किसी सचेत प्रयास का कोई नियंत्रित परिणाम नहीं है. कवि की स्वभावगत बेचैनी और उसे प्रकट करने की स्वाभाविकता से...
फ़ैज़ ने अपने एक शेर में कहा है कि ‘जो कू-ए-यार से निकले तो सू-ए-दार चले’. प्रेम का बदलाव से, प्रतिरोध से और परिवर्तन से गहरा नाता रहा है. टूट...
कवि अपनी प्रेयसियों पर कविताएँ लिखते रहें हैं. प्रिय कवियों पर भी कविताएँ लिखीं गयीं हैं. ज्योति शोभा ने पांच शहरों के अपने प्रिय कवियों पर कविताएँ लिखीं हैं. ये...
"कभी कभी आत्मा में धँसी सिर्फ़ एक पंक्ति कहने को/लिखता हूँ पूरी कविता " जैसे बीज में वृक्ष रहता है. कभी-कभी तो एक शब्द में रहती है पूरी कविता. हवा,...
मूर्तिकार अपने शिल्प में डूबा हुआ ख़ुद में डूब जाता है. रचनात्मकता भी अध्यात्म है. सृजनात्मक लोगों को अलग से प्रार्थना की आवश्यकता नहीं रहती, उनका सृजन-कर्म ही मंत्र है....
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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