अशोक वाजपेयी: कुछ और कविताएँ
कहना न होगा कि आज हिंदी क्षेत्र की सांस्कृतिक साक्षरता और समृद्धि के लिए साहित्य, कला और विचार के क्षेत्र में काम करने वाले सैकड़ों दृष्टि सम्पन्न नवोन्मेषी प्रतिभाओं की...
कहना न होगा कि आज हिंदी क्षेत्र की सांस्कृतिक साक्षरता और समृद्धि के लिए साहित्य, कला और विचार के क्षेत्र में काम करने वाले सैकड़ों दृष्टि सम्पन्न नवोन्मेषी प्रतिभाओं की...
हिंदी कविता की जड़े देखनी हो तो सिद्धों-नाथों की कविताओं को पढ़ना चाहिए. गहरी और फैली हुईं. ख़ासकर गोरखनाथ को. यहीं से भक्तिकाल की ज़मीन तैयार हुई जिसमें कबीर जैसा...
कविता का कार्य सूचित करना नहीं अर्थ देना है. कौशलेन्द्र की कविता-यात्रा में इसे देखा जा सकता है. बताने से अधिक वह दिखाने की और अग्रसर हैं. उनकी कविताएँ पढ़ते...
युद्धों की बर्बरता का प्रतिपक्ष कविता में है. महायुद्दों ने महाकाव्यों को जन्म दिया है. विश्वयुद्दों से तीखी झड़प अस्तित्ववादी दर्शन और उससे प्रभावित कलाएँ करती हैं. वर्तमान में युद्धों...
अब युद्ध हथियारों और आख्यानों के साथ लड़े जाते हैं. हथियार ज़मीन पर गिरते हैं और आख्यान दिमाग़ पर असर करता है, कुछ इस तरह कि पीड़ित ही आततायी लगने...
गिरिराज किराडू को उनकी पहली प्रकाशित कविता ‘मेज’ के लिए भारतभूषण अग्रवाल सम्मान मिला था. पिछले दो दशकों से संपादन और साहित्य के आयोजनों के बीच कविता उनके साथ रही...
कवि बोधिसत्व की इस कविता में गांधी जी से जो सवाल पूछे गये हैं, अगर आज वह होते तो जैसी उनकी आदत थी कुछ समय लेते और हो सकता है...
उस्मान ख़ान की कुछ कविताएँ प्रस्तुत हैं. वरिष्ठ कवि देवी प्रसाद मिश्र के अनुसार, “ उस्मान की कविता में भारतीय नागरिकता के अजनबी में बदलने की निरुपायता और उससे निसृत...
संभावनाशील चाहत अन्वी की कुछ कविताएँ प्रस्तुत हैं. इनपर एक टिप्पणी कवि अनुज लुगुन ने लिखी है.
समालोचन ‘असहमति की सौ कविताएँ’ के अपने विशेष अंक का यह पहला हिस्सा प्रस्तुत कर रहा है. इसमें सच, साहस और सौन्दर्य है. ये सबसे पहले कविताएँ हैं. इस अंक...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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