कोई कहानी अपने समय का आईना कब बन जाती है, यह उसके शिल्प और दृष्टि, दोनों से तय होता है....
साहित्य और इतिहास का संबंध अनुकरण या प्रतिबिंब का नहीं है. यह एक जटिल अंतःसंवाद है, जिसमें इतिहास साहित्य के...
अनुराग अनंत के कहानी-संग्रह ‘मुहावरे की मौत’ की चर्चा कवि-लेखक पवन करण कर रहे हैं. यह संग्रह लोकभारती से प्रकाशित...
सबऑल्टर्न अध्ययन समूह के संस्थापक सदस्य, राजनीतिक सिद्धांतकार, मानवशास्त्री और इतिहासकार पार्थ चटर्जी ने अंग्रेज़ी और बांग्ला में तीस से...
‘मैं बेहोशी का एक पत्थर था’ वीरू सोनकर का दूसरा कविता-संग्रह है, जिसे ‘अनबाउंड स्क्रिप्ट’ ने प्रकाशित किया है. इसकी...
वरिष्ठ आलोचक वीरेंद्र यादव के आकस्मिक निधन ने समकालीन वैचारिक परिदृश्य में एक गहरी रिक्ति उत्पन्न कर दी है. स्वतंत्रता-संघर्ष...
अपमान कोई आकस्मिक या अपने में स्वतंत्र घटना नहीं है. वह विभिन्न रूपों में, विभिन्न स्थलों पर घटित होता रहता...
क्या आप तेग़ अली को जानते हैं? वे भोजपुरी भाषा के पहले साहिब-ए-दीवान हैं. उनका ग़ज़लों का संग्रह ‘बदमाशदर्पण’ उन्नीसवीं...
असंगतियों, अन्याय एवं अनाचार के विरोध का तरीका अंततः समाज ही विकसित करता है और उसका निरंतर अभ्यास भी करता...
समालोचन पर ही आपने विनोद कुमार शुक्ल की अंतिम कविता पढ़ी, ‘कृति’ में पहली बार प्रकाशित उनकी कविताएँ भी. यह...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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