किंशुक गुप्ता चिकित्सक हैं. हिंदी और अंग्रेजी में लिखते हैं. उनकी कहानियां इधर हिंदी की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित होकर...
अवतारवाद की अवधारणा भारतीय चिंतन के केंद्र में रही है, इसकी व्याप्ति इतनी है कि इसके विरोधी भी कालान्तर में...
प्रिया वर्मा की कविताओं पर टिप्पणी में देवीप्रसाद मिश्र ने ‘पितृपक्षीय गार्हस्थ्य को उजाड़ने के आग्रहों से भरी’ कहते हुए...
प्रिया वर्मा की कविताएँ इधर उभर कर सामने आयीं हैं. वे लगातार लिख रहीं हैं. हिंदी कविता में अब दशक...
रचनाकारों की रचनाएँ सामने आती हैं, उनकी ज़मीन, उनका तलघर अदृश्य रहता है जहाँ से वे अपनी रचनात्मकता के लिए...
वरिष्ठ कथाकार और ‘तद्भव’ के यशस्वी संपादक अखिलेश की पुस्तक ‘अक्स’ जिसका प्रकाशन इसी वर्ष ‘सेतु’ ने किया है पर...
विष्णु खरे ने समालोचन पर ही एक जगह लिखा था- ‘महेश वर्मा उन प्रतिभावान युवा कवि-कवयित्रियों में से हैं जिनकी...
कथाकार राजेन्द्र दानी के दस कहानी संग्रह प्रकाशित हुए हैं, वर्षों से वह हिंदी की महत्वपूर्ण पत्रिका ‘पहल’ से जुड़े...
‘हठात् वृष्टि’ समालोचन पर अम्बर पाण्डेय की दसवीं कहानी है, केवल इन्हीं कहानियों के संकलन से उनका पहला कहानी-संग्रह तैयार...
पत्रिकाएं छपतीं हैं, प्रकाशित सामग्री की चर्चा भी होती है पर सम्पूर्णता में पत्रिका की भूमिका को समझने के लिए...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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