पंखुरी सिन्हा की कविताएँ
शहरों को केंद्र में रखकर कविताएँ लिखी जाती रही हैं, नगर की संवेदनात्मक उपस्थिति की पहचान का यह रचनात्मक उपक्रम कला, इतिहास और राजनीति की समझ से निर्मित होता है....
शहरों को केंद्र में रखकर कविताएँ लिखी जाती रही हैं, नगर की संवेदनात्मक उपस्थिति की पहचान का यह रचनात्मक उपक्रम कला, इतिहास और राजनीति की समझ से निर्मित होता है....
कृति : Gigi-scariaकवि चित्रकार शैलेन्द्र दुबे का एक संग्रह ‘हमने ख़ुशी के कुछ दिन तय किये’ २०१५ में प्रकाशित हुआ था. शैलेन्द्र की कविताएँ अपनी भंगिमा में मुखर नहीं है पर...
कालजयी रचनाकार काल को इसीलिए जीत लेते हैं कि उनसे हमेशा अंकुर फूटते रहते हैं, उनमें यह संभावना रहती है. देश–काल से परे भी उनके सभ्यागत निहितार्थ होते हैं. कोलम्बिया...
हमारे समय के महत्वपूर्ण कवि शिरीष कुमार मौर्य की कविताएँ आपके लिए.शिरीष को समालोचन की तरफ से जन्म दिन की बहुत-बहुत बधाई.शिरीष कुमार मौर्य भूस्खलनसड़कों पर खंड-खंड पड़ा है हृदयमेरे पहाड़...
(Courtesy: Saumya Baijal)अंकिता आनंद की सक्रियता का दायरा विस्तृत है. नाटकों ने उनके अंदर के कवि को समुचित किया है. उनकी कविताओं में पाठ का सुख है, शब्दों के महत्व को...
सरबजीत गरचा हिंदी और अंग्रेजी में कविताएँ लिखते हैं. मराठी से हिंदी और अंग्रेजी में उनके किये अनुवाद सराहे गए हैं. यहाँ उनकी पांच कविताएँ प्रस्तुत हैं. इन कविताओं में...
G.R Iranna/ RED EARTHबीसवीं सदी के अंतिम दशक में जो कवि प्रमुखता से सामने आए उनमें अनिल गंगल का नाम महत्वपूर्ण है, उनके चार- कविता संग्रह प्रकाशित हैं. अनिल की कविताएँ...
(कृति : vipul prajapati)तेजी की कविताओं पर फौरी तौर पर कुछ कहना उस अनुभव को तबाह कर देना है जो इन कविताओं को पढ़ते हुए आप पर तारी होता है.इयुजेनियो...
Pablo Picasso, Guitar (1913). संगीत से कविता का पुराना नाता है. संगीत ने कविता को स्थायित्व प्रदान किया है. जिन कविताओं को संगीत ने अपना सुर दिया वे अमर हो...
कृति : Gigi Scaria कविता में कवि जब खुद की ओर मुडता है तब वह अस्तित्वगत प्रश्नों की तरफ भी जाता है. आख़िरकार इस विश्व में वह क्यों कर है...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
सर्वाधिकार सुरक्षित © 2010-2023 समालोचन | powered by zwantum