कविता

आमिर हमज़ा: और वह एक रोज़मर्रा एक रोज़ आदमिस्तान के मकड़जाल से छूट क़ब्रिस्तान के तसव्वुर में जा पहुँचा

आमिर हमज़ा: और वह एक रोज़मर्रा एक रोज़ आदमिस्तान के मकड़जाल से छूट क़ब्रिस्तान के तसव्वुर में जा पहुँचा

युवा आमिर हमज़ा की काव्य-संभावनाएं उनकी पिछली कविताओं में मुखर थीं, इस लम्बी कविता में उनका सामर्थ्य देखा जा सकता है. लम्बी कविता की निर्मिति में विवरणों का अधिकतम काव्यात्मक...

कविता: सविता सिंह और विजय कुमार

कविता: सविता सिंह और विजय कुमार

सविता सिंह की प्रस्तुत कविताएँ उनकी काव्य-यात्रा के अगले पड़ाव को सूचित करती हैं. इन कविताओं की स्त्री स्वतंत्र इकाई के रूप में भी अपने को देखती है. इन नयी...

नाज़िश अंसारी की कविताएँ

नाज़िश अंसारी की कविताएँ

मनुष्य की मूल प्रवृत्तियों ने भाषा के सौन्दर्य के साथ मिलकर कविता में जो घटित किया, उसकी खुशबु कभी नहीं जायेगी. समय की यात्रा करते हुए किसी ताज़े खिले फूल...

सौम्य मालवीय की कविताएँ

सौम्य मालवीय की कविताएँ

अपने पहले कविता संग्रह ‘घर एक नामुमकिन जगह है’ के लिए भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार, २०२२ से सम्मानित सौम्य मालवीय की कविताओं को सुनने का अवसर रज़ा द्वारा आयोजित सम्मान समारोह...

अपर्णा मनोज की कविताएँ

अपर्णा मनोज की कविताएँ

साहित्य में ऐसे कुछ रचनाकार हैं, जिन्हें पढ़कर कहना पड़ता है कि उन्हें नियमित लिखते रहना चाहिए. अपर्णा मनोज ने कविताएँ लिखीं हैं, उनके पास कुछ कहानियां हैं और अनुवाद...

बाघ: सुमित त्रिपाठी की कविताएँ

बाघ: सुमित त्रिपाठी की कविताएँ

वन में व्याघ्र की उपस्थिति की दहाड़ मिथकों में भी सुनाई पड़ती है. वह लोक में विचरण करता है. कथाओं में आता जाता है. वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह की 1996...

हिरणी का विनय पत्र ! : बोधिसत्व

हिरणी का विनय पत्र ! : बोधिसत्व

लोक सहज ही मार्मिक है, विशिष्ट को साधारण बनाकर सुख-दुःख उससे जोड़ देता है. जिसे शास्त्र कहने में हिचकते हैं उसे लोक गाता है. अवध और उसके आस-पास एक लोकगीत...

रूपम मिश्र की कविताएँ

रूपम मिश्र की कविताएँ

रूपम मिश्र का पहला कविता संग्रह ‘एक जीवन अलग से’ अभी प्रकाशित ही हुआ है. उनकी प्रेम कविताओं में भी समाज और उसकी अनीति पथरीली जमीन की तरह बिछी रहती...

चर्यापद: शिरीष कुमार मौर्य

चर्यापद: शिरीष कुमार मौर्य

शिरीष कुमार मौर्य की चर्यापद श्रृंखला की 17 कविताएँ 2019 में यहीं प्रकाशित हुईं थीं. इनकी पर्याप्त चर्चा हुई. कुमार अम्बुज के शब्दों में- “ये कविताएँ इस कदर अच्छी हैं...

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