समीक्षा

उसे निहारते हुए: वागीश शुक्ल

उसे निहारते हुए: वागीश शुक्ल

प्राकृत शब्द 'पडिक्कमा' का अर्थ है 'प्रतिक्रमण' या 'लौटना'. इस संग्रह की कुछ कविताएँ परिजनों की मृत्यु की परिक्रमा करती हैं. प्रेम पर कुछ बहुत सुंदर कविताएँ हैं. ग्यारहवीं सदी...

वे नायाब औरतें : अलका सरावगी

वे नायाब औरतें : अलका सरावगी

वरिष्ठ लेखिका मृदुला गर्ग के संस्मरणों की पुस्तक ‘वे नायाब औरतें’ पात्रों की जीवंतता और भाषा की रवानी के कारण पठनीय तो है ही लेखिका के समय का दिलचस्प दस्तावेज़...

आसमाँ और भी हैं: नरेश गोस्वामी

आसमाँ और भी हैं: नरेश गोस्वामी

औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति के सवाल से भारत अपनी आज़ादी के संघर्ष से ही जूझता रहा है. इसका एक सिरा आत्म की खोज की तरफ जाता है तो दूसरा सिरा...

कीड़ाजड़ी : प्रवीण कुमार झा

कीड़ाजड़ी : प्रवीण कुमार झा

वह भी कोई देस है महराज’ के लेखक अनिल यादव की पुस्तक ‘कीड़ाजड़ी’ भी चर्चा में हैं. कीड़ाजड़ी शक्तिवर्धक औषधि है जो दुर्लभ है और इसलिए मूल्यवान भी. इस यात्रा-वृत्तांत...

तथागत का समय: सूर्यनारायण रणसुभे

तथागत का समय: सूर्यनारायण रणसुभे

प्रदीप गर्ग की अकबर के जीवन पर आधारित पुस्तक ‘A Forgotten Legacy’ प्रकाशित हो चुकी है, बुद्ध और उनके समय पर आधारित उनका हिंदी में ‘तथागत फिर नहीं आते’ उपन्यास...

वे नायाब औरतें: जयंती रंगनाथन

वे नायाब औरतें: जयंती रंगनाथन

महादेवी वर्मा की गद्य कृतियाँ ख़ासकर आस-पास के चरित्रों पर आधारित उनके रेखाचित्र और संस्मरण जो ‘अतीत के चलचित्र’, ‘स्मृति की रेखाएँ’, ‘पथ के साथी’, ‘मेरा परिवार’ आदि में संकलित...

नौटंकी की लोक परम्परा और अतुल यदुवंशी का रंगकर्म:  सत्यदेव त्रिपाठी

नौटंकी की लोक परम्परा और अतुल यदुवंशी का रंगकर्म: सत्यदेव त्रिपाठी

शास्त्र के निर्मित हो जाने पर प्रयोग की परम्परा को उससे जोड़ कर अक्सर देखा जाता है. भरतमुनि के नाट्यशास्त्र से प्रचलित या लुप्त सभी नाट्य विधाओं के जुड़ाव को...

कृष्ण कल्पित की कविता :  सदाशिव श्रोत्रिय

कृष्ण कल्पित की कविता : सदाशिव श्रोत्रिय

अरुण कमल, नंदकिशोर आचार्य एवं गगन गिल के निर्णायक मंडल ने कृष्ण कल्पित को उनके कविता-संग्रह 'हिंदनामा’ के लिए प्रथम ‘डॉ. सावित्री मदन डागा स्मृति साहित्य सम्मान’ देने की घोषणा...

उत्सव का पुष्प नहीं हूँ: शिव किशोर तिवारी

उत्सव का पुष्प नहीं हूँ: शिव किशोर तिवारी

‘उत्सव का पुष्प नहीं हूँ’ अनुराधा सिंह का दूसरा कविता संग्रह है जिसे वाणी ने प्रकाशित किया है. वरिष्ठ लेखिका अनामिका के अनुसार अनुराधा लम्बी गहरी साँसों की तरह पूरे...

स्मृतियों का खिला फूल: स्वप्निल श्रीवास्तव

स्मृतियों का खिला फूल: स्वप्निल श्रीवास्तव

वरिष्ठ कथाकार अशोक अग्रवाल की पुस्तक ‘संग साथ’ के कुछ संस्मरण पत्रिकाओं में प्रकाशित होकर चर्चा के विषय रहें हैं. स्मृति, लगाव और जीवन की धूप-छाँव के निराले वृत्तकार के...

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