समाज

नारीवाद बनाम पितृसत्ता : रूबल

नारीवाद बनाम पितृसत्ता : रूबल

नारीवाद आधुनिक विश्व के कुछ महत्वपूर्ण विचारों में से एक है, यह जनांदोलन भी है और राजनीति भी. समानता, स्वतंत्रता और व्यक्ति की गरिमा जैसे मूल्यों से उपजे इसी नारीवाद...

शास्त्रार्थ में नेहरू: मनोज कुमार

शास्त्रार्थ में नेहरू: मनोज कुमार

इधर गम्भीर विमर्शों में जवाहरलाल नेहरू की वापसी हुई है, जिस तरह से उन्हें सार्वजनिक जगहों और स्मृतियों से बेदखल करने के सुनियोजित षड्यंत्र हुए हैं, उसकी यह स्वाभाविक प्रतिक्रिया...

मैनेजर पाण्डेय की दृष्टि में लोकतंत्र:  रविभूषण

मैनेजर पाण्डेय की दृष्टि में लोकतंत्र: रविभूषण

इसी वर्ष महत्वपूर्ण आलोचक रविभूषण की वैचारिक पुस्तक ‘कहाँ आ गये हम वोट देते-देते’ सेतु से प्रकाशित हुई है. वे हिंदी के कुछ गिने चुने आलोचकों में हैं जिनकी आलोचना...

उत्तर भारत के घुमंतू और विमुक्त समुदाय: रमाशंकर सिंह

उत्तर भारत के घुमंतू और विमुक्त समुदाय: रमाशंकर सिंह

ब्रिटिश सरकार ने 1871 में ‘Criminal Tribes Act’ लागू किया था जिसके अंतर्गत लगभग डेढ़ सौ जनजातियों (190 के करीब समुदाय) को जन्मजात अपराधी घोषित कर दिया गया, उन्हें कभी...

पॉल रिचर्ड ब्रास:  कुँवर प्रांजल सिंह

पॉल रिचर्ड ब्रास: कुँवर प्रांजल सिंह

राजनीति विज्ञान और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के विद्वान प्रो. पॉल रिचर्ड ब्रास (जन्म: 8 नवम्बर 1936, अमेरिका) ने लगभग पांच दशकों से अपनी रुचि और अध्ययन का क्षेत्र भारतीय उपमहाद्वीप को...

महात्मा गांधी: मृत्यु-बोध, हमले और हत्या: अमरेन्द्र कुमार शर्मा

महात्मा गांधी: मृत्यु-बोध, हमले और हत्या: अमरेन्द्र कुमार शर्मा

महात्मा गांधी की हत्या भारत पर ऐसा कलंक है जिससे वह चाह कर भी छुपा नहीं सकता, उससे बच नहीं सकता. महात्मा गांधी ख़ुद मृत्यु के विषय में क्या सोचते...

महात्मा गांधी का जेल-जीवन:  मोहसिन ख़ान

महात्मा गांधी का जेल-जीवन: मोहसिन ख़ान

जनवरी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की शहादत का महीना है, ३० जनवरी को उनकी शहादत के ७४ साल हो जाएंगे. इन वर्षों में गांधी का भारत बदल गया है, उनके आदर्शों...

सुंदरलाल बहुगुणा: प्रज्ञा पाठक

सुंदरलाल बहुगुणा: प्रज्ञा पाठक

प्रसिद्ध गांधीवादी और पर्यावरण संरक्षण के लिए चले चिपको आंदोलन के प्रणेता सुंदरलाल बहुगुणा (9 जनवरी सन 1927 - 21 मई 2021) को स्मरण कर रहीं हैं लेखिका प्रज्ञा पाठक.

कांवड़-यात्रा: पारम्‍परिक तीर्थों का समकालीन प्रतिस्‍थापन:  नरेश गोस्‍वामी

कांवड़-यात्रा: पारम्‍परिक तीर्थों का समकालीन प्रतिस्‍थापन: नरेश गोस्‍वामी

कावड़-यात्रा इधर सबसे तेजी से उभरता हुआ धार्मिक आयोजन है, देखते-देखते ही इसने ख़ासकर पश्चिमी उत्तर-प्रदेश में बड़े धार्मिक जुलूस का रूप ले लिया है. समाज विज्ञानी नरेश गोस्वामी इधर...

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