समाज

महामारी : आर्थिक, राजनीतिक एवं सामाजिक दृष्टिकोण : सौरव कुमार राय

(Photo courtesy : Ben Mckeown )कोरोना आपदा को केंद्र में रखकर लिखे गये वैचारिक और सृजनात्मक लेखन समालोचन पर आप अनवरत पढ़ रहें हैं अबतक आपने- अशोक वाजपेयी, विजय कुमार...

छज्जे से झाँकती पृथ्वी : संतोष अर्श

कोरोना जैसी महामारियाँ सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक के साथ-साथ नैतिक संकट भी खड़ा करती हैं. अब तक अर्जित और प्रचारित सभी तरह के कल्याणकारी मुखौटे एक-एक उतरने लगते हैं. इस महाव्यवस्था...

उपनिवेश में महामारी और स्त्रियाँ : सुजीत कुमार सिंह

(Female patient recovering from bubonic plague) आज सम्प्रभु भारत कोरोना महामारी से जूझ रहा है, अंग्रेजी राज में जब प्लेग, हैजा, मलेरिया आदि महामारियाँ फैलतीं थीं तब तत्कालीन पत्र-पत्रिकाओं की...

कोरोना : सभ्यता का संकट: सुशील कृष्ण गोरे

दिक्कत यह है कि मनुष्य अपने को इस धरती का सर्वश्रेष्ठ प्राणी समझता है, उसके धर्म भी उसे यही मिथ्या विश्वास देते रहते हैं. प्रकृति के लिए मनुष्य और किसी...

डबल सेवेन: ‘अच्छे दिनों’ का कोल्ड ड्रिंक : सौरव कुमार राय

क्या आपको ‘राष्ट्रीय शीतल पेय’ ‘डबल सेवेन’ की कभी याद आती है, वही पेय जिसे जनता पार्टी की सरकार ने १९७७ में कोका-कोला के विकल्प में विकसित और प्रचारित किया...

हिंदू-एकता बनाम ज्ञान की राजनीति (अभय कुमार दुबे) : नरेश गोस्वामी

विकासशील समाज अध्ययन पीठ (CSDS) के प्रोफ़ेसर, भारतीय भाषा कार्यक्रम के निदेशक और \'प्रतिमान\' के प्रधान संपादक अभय कुमार दुबे को अक्सर टीवी चैनलों की बहसों में हम सुचिंतित हस्तक्षेप...

महात्मा गांधी का राष्ट्र : मोहसिन ख़ान

महात्मा गांधी का राष्ट्र : मोहसिन ख़ान

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी अपने स्वतंत्र राष्ट्र में छह महीने भी जीवित नहीं रह सके, उनकी हत्या अंध राष्ट्रवाद और सांप्रदायिक उन्माद ने कर दी. भारत इस अपराध-बोध से कभी भी...

महात्मा गाँधी का अधूरा भाषण: राजीव रंजन गिरि

महात्मा गाँधी का अधूरा भाषण: राजीव रंजन गिरि

आज से १०० साल पहले 4 फ़रवरी 1916 को बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना के अवसर पर गाँधीजी अपना भाषण दे रहे थे.  एनी बेसेंट, सदारत कर रहे दरभंगा महाराज...

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