समाज

क्या हो बच्चे का धर्म ? सुभाष गाताडे

क्या हो बच्चे का धर्म ? सुभाष गाताडे

बच्चे का जन्म लेना जैविक क्रिया है लेकिन उसका धार्मिक बनना सामाजिक प्रक्रिया है जिसमें उसका कोई दखल नहीं होता है. अक्सर माँ-पिता के धर्म ही बच्चे के धर्म हो...

किसान आंदोलन: सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक आयाम : लाल बहादुर वर्मा, विनोद शाही, राकेश गुप्त एवं अक्षत शाही

किसान आंदोलन: सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक आयाम : लाल बहादुर वर्मा, विनोद शाही, राकेश गुप्त एवं अक्षत शाही

  किसी भी आंदोलन के क्रांतिकारी होने के लिए जरूरी है कि वह आमूल परिवर्तन उपस्थित करे, सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक बदलाव लाये. दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का...

किसान आंदोलन और सांस्कृतिक क्रांति की संभावना: विनोद शाही

किसान आंदोलन और सांस्कृतिक क्रांति की संभावना: विनोद शाही

कृषि कानूनों में बदलाव और सुधार के लिए प्रारम्भ होने वाला किसान आंदोलन धीरे-धीरे अपना अखिल भारतीय स्वरूप ग्रहण करता जा रहा है, इसमें सभी वर्गों और स्त्री-पुरुष दोनों की...

हमारे समय में गांधी: सूरज पालीवाल

हमारे समय में गांधी: सूरज पालीवाल

महात्मा गांधी की १५१ वीं जयंती पर उन्हें स्मरण करते हुए मैं सोच रहा था कि बापू आज जिंदा होते तो क्या कर रहे होते ? अपने आश्रम में क्या...

रजनी कोठारी और भारत में राजनीति : प्रांजल सिंह

सुप्रसिद्ध राजनीति-वैज्ञानिक और विचारक रजनी कोठारी (६ अगस्त १९२८ – १९ जनवरी २०१५) की कालजयी कृति ‘पॉलिटिक्स इन इंडिया’ का प्रकाशन १९७० में हुआ था. यह इसका स्वर्ण जयंती वर्ष है....

महामारी : आर्थिक, राजनीतिक एवं सामाजिक दृष्टिकोण : सौरव कुमार राय

(Photo courtesy : Ben Mckeown )कोरोना आपदा को केंद्र में रखकर लिखे गये वैचारिक और सृजनात्मक लेखन समालोचन पर आप अनवरत पढ़ रहें हैं अबतक आपने- अशोक वाजपेयी, विजय कुमार...

छज्जे से झाँकती पृथ्वी : संतोष अर्श

कोरोना जैसी महामारियाँ सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक के साथ-साथ नैतिक संकट भी खड़ा करती हैं. अब तक अर्जित और प्रचारित सभी तरह के कल्याणकारी मुखौटे एक-एक उतरने लगते हैं. इस महाव्यवस्था...

उपनिवेश में महामारी और स्त्रियाँ : सुजीत कुमार सिंह

(Female patient recovering from bubonic plague) आज सम्प्रभु भारत कोरोना महामारी से जूझ रहा है, अंग्रेजी राज में जब प्लेग, हैजा, मलेरिया आदि महामारियाँ फैलतीं थीं तब तत्कालीन पत्र-पत्रिकाओं की...

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