घेराबंदी और अन्य कविताएँ: फ़रीद ख़ाँ
‘काग़ज़ के प्रदेश में’, ‘चुप्पी का शोर’, ‘योजनाओं का शहर’ और ‘तनी हुई रस्सी पर’ के बाद ‘घेराबंदी और अन्य ...
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‘काग़ज़ के प्रदेश में’, ‘चुप्पी का शोर’, ‘योजनाओं का शहर’ और ‘तनी हुई रस्सी पर’ के बाद ‘घेराबंदी और अन्य ...
‘कर्फ़्यू की रात’ कथाकार शहादत का दूसरा कहानी संग्रह है. उन्होंने उर्दू शायर ज़हीर देहलवी की आत्मकथा ‘दास्तान-ए-1857’, मकरंद परांजपे ...
संकीर्ण विचारों से देश तो क्या परिवार नहीं चल सकते. गणतंत्र उदात्त विचारों की नींव पर खड़े होते हैं. करुणा ...
कृष्ण प्रताप सिंह (फ़ैज़ाबाद) वरिष्ठ पत्रकार और कवि हैं. अवध के इतिहास पर लिखते रहें हैं. ‘ज़ीरो माइल अयोध्या’ में ...
समालोचन ‘असहमति की सौ कविताएँ’ के अपने विशेष अंक का यह पहला हिस्सा प्रस्तुत कर रहा है. इसमें सच, साहस ...
फ़रीद ख़ाँ मुंबई में टीवी और फ़िल्मों के लिए पटकथा लिखते हैं. हिंदी के कवि हैं. अभी उनकी पुस्तक आई ...
बीसवीं शताब्दी को प्रसिद्ध इतिहासकार एरिक हॉब्सबॉम ने अतियों का युग (The Age of Extremes) कहा है. 21वीं शताब्दी में ...
फ़रीद ख़ाँ को हिंदी कवि के रूप में हम सब जानते ही हैं, कथाकार फ़रीद ख़ाँ इस कहानी से अब ...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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