कविता क्या है? की चौ-पाई : वागीश शुक्ल
यह जानकर विस्मय होता है कि नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना 1893 में बाबू श्यामसुंदर दास ने शिवकुमार सिंह और ...
यह जानकर विस्मय होता है कि नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना 1893 में बाबू श्यामसुंदर दास ने शिवकुमार सिंह और ...
बीसवीं सदी के आरंभ में जब भारतीय समाज में नवजागरण की हलचलें तेज़ हो रही थीं, तब पंडित ठाकुरदत्त शर्मा ...
वरिष्ठ कवि लाल्टू की कविताएँ सामाजिक जटिलताओं, अन्याय और प्रतिरोध से गुजरते हुए अस्तित्व की निरुपायता तक पहुँचती हैं. मनुष्य ...
नॉर्वेजियन लेखक शेल आस्किल्ड्सन (Kjell Askildsen, 1929–2021) की कहानी ‘A Sudden Liberating Thought’ का प्रकाशन एक घटना है. इसे न्यूनतम ...
रतन थियम का जाना रंगमंच के एक युग का अवसान है. मंचन में वे कल्पनाशीलता की पराकाष्ठा थे. सम्मोहक शब्द ...
फ़िराक़ गोरखपुरी का मानना था कि ग़ालिब की शायरी में खुदा से उलझते सवाल हैं, जवाब नहीं और यही उन्हें ...
तेजी ग्रोवर (1955) के छह कविता संग्रह प्रकाशित हैं. उनकी कृतियाँ देश-विदेश की तेरह भाषाओं में अनूदित हुई हैं. ‘संभावना’ ...
आज स्त्री की चुनौतियाँ और बढ़ी हैं. दहलीज़ तो अपनी जगह है ही उसके बाहर की दुनिया के कील कांटे ...
कृष्ण खन्ना के शतायु होने का अवसर उनकी कला-साधना को समझने का भी अवसर है. चित्रकार और लेखक अखिलेश ने ...
भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका में अनेक पुरस्कारों से सम्मानित कुशाग्र अनिकेत न्यू यॉर्क में अर्थशास्त्र और प्रबंधन के विशेषज्ञ ...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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