हिरणी का विनय पत्र ! : बोधिसत्व
लोक सहज ही मार्मिक है, विशिष्ट को साधारण बनाकर सुख-दुःख उससे जोड़ देता है. जिसे शास्त्र कहने में हिचकते हैं ...
लोक सहज ही मार्मिक है, विशिष्ट को साधारण बनाकर सुख-दुःख उससे जोड़ देता है. जिसे शास्त्र कहने में हिचकते हैं ...
गरिमा श्रीवास्तव का स्त्री-विमर्श से सम्बन्धित शोध और लेखन महत्वपूर्ण है. वह लगातार इस दिशा में अग्रसर हैं, स्त्री इतिहास ...
मार्खेज़ की कहानियों के हिंदी अनुवादों की यह बारहवीं क़िस्त है, अधिकतर अनुवाद सुशांत सुप्रिय ने किए हैं जो ख़ुद ...
रूपम मिश्र का पहला कविता संग्रह ‘एक जीवन अलग से’ अभी प्रकाशित ही हुआ है. उनकी प्रेम कविताओं में भी ...
के. मंजरी श्रीवास्तव रंगमंच की देसी-विदेशी गतिविधियों से गहरे जुड़ी हैं. युवा नाट्य निर्देशकों के रंगमंचीय प्रयोगों को वह उत्सुकता ...
चंद्रभूषण का लिखा ‘पच्छूँ का घर’ उस कार्यकर्ता की कहानी है जिसने जनसंघर्षों का वह दौर देखा है जिसमें वैचारिकता, ...
इधर हिंदी में विषय केन्द्रित कई कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं जिनमें विनय कुमार की ‘यक्षिणी’ चर्चित रही है. उनका ...
कविता कविता होती है या फिर नहीं होती, ‘गद्य कविता’ जैसी कोई चीज नहीं है. जिसे हम ‘गद्य कविता’ कहते ...
प्रसिद्ध शिल्पकार शम्पा शाह साहित्य से गहरे आबद्ध हैं. आदिवासी कला आदि पर उनका लिखा महत्व का है. गगन गिल ...
शिरीष कुमार मौर्य की चर्यापद श्रृंखला की 17 कविताएँ 2019 में यहीं प्रकाशित हुईं थीं. इनकी पर्याप्त चर्चा हुई. कुमार ...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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