आलेख

अपने-अपने रहीम: हरीश त्रिवेदी

अपने-अपने रहीम: हरीश त्रिवेदी

रहीम (17 दिसम्बर, 1556 – 1 अक्तूबर, 1627) को हिंदी पढ़ने वाले उनके नीति के दोहों के कारण जानते हैं और अपना कवि मानते हैं. विख्यात विद्वान प्रो. हरीश त्रिवेदी...

जिनहर्षगणि कृत रत्नशेखर नृप कथा: माधव हाड़ा

जिनहर्षगणि कृत रत्नशेखर नृप कथा: माधव हाड़ा

लगभग ६०० साल पूर्व चित्तौड़गढ़ में प्राकृत में लिखी जिनहर्षगणि के महाकाव्य रत्नशेखर नृप कथा को प्रस्तुत करते हुए पहली बात तो यही लगती है कि भारत में कथा कहने...

तरुण भटनागर: भविष्य के सपनों का कथाकार: निशांत

तरुण भटनागर: भविष्य के सपनों का कथाकार: निशांत

समकालीन प्रमुख कथाकार तरुण भटनागर के उपन्यासों- ‘लौटती नहीं जो हँसी’, ‘राजा, जंगल, और काला चाँद’ तथा ‘बेदावा’ पर आधारित सुपरिचित कवि-लेखक निशांत का यह आलेख विस्तार से इन उपन्यासों...

स्मृतियां काल के घमंड को तोड़ती हैं: अखिलेश

स्मृतियां काल के घमंड को तोड़ती हैं: अखिलेश

कथाकार और ‘तद्भव’ पत्रिका के यशस्वी संपादक अखिलेश का यह आलेख आत्म के विविध आयामों से गुजरते हुए उसकी रचनात्मक रूपांतरण की प्रविधि को समझने की कोशिश करता है. व्यक्ति...

कौन था बेचू ? यादवेन्द्र

कौन था बेचू ? यादवेन्द्र

औपनिवेशिक भारत में मजदूरों को भारत से दूर देशों में खटने के लिए ले जाया जाता था जहाँ वे अकथ शोषण और प्रताड़ना के शिकार होते थे. उन्हीं के बीच...

मंगलेश की मंगलेशियत: रविभूषण

मंगलेश की मंगलेशियत: रविभूषण

आज मंगलेश डबराल की पुण्यतिथि है, पिछले वर्ष आज ही के दिन वह हमसे हमेशा के लिए जुदा हो गये थे. आज रघुवीर सहाय का जन्म दिन भी है. ‘रघुवीर...

मेरे ज्ञानरंजन: हीरालाल नागर

मेरे ज्ञानरंजन: हीरालाल नागर

वरिष्ठ कथाकार और ‘पहल’ पत्रिका के यशस्वी संपादक ज्ञानरंजन ने आज जीवन के पचासी वर्ष पूरे कर लिए हैं, समालोचन की तरफ से जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई. इस अवसर पर...

स्मृतिशेष: मन्नू भंडारी: गरिमा श्रीवास्तव

स्मृतिशेष: मन्नू भंडारी: गरिमा श्रीवास्तव

मन्नू भंडारी (3 अप्रैल, 1931-15 नवम्बर, 2021) को देखिये तो महादेवी वर्मा की याद आती थी, वैसी ही सादगी और गरिमा. जीवन-वृत्त और सृजित साहित्य में भी समानताएं तलाशी जा...

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